जिला प्रशासन की नाकामी कार्रवाई के चलते ड्रग माफियाओं के हौंसले बुलंद

प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान पहले तो ड्रग माफियाओं के लायसेंस निरस्त किए, दो दिन बाद नाटकीय ढंग से कर दिए बहाल

आम जनता के बीच प्रशासनिक कार्रवाई पर लगे सवालिया निशान
रघु कोठारी/आशुतोष पंचोली
अलीराजपुर न्यूज। 
आदिवासी अंचल अलीराजपुर जिले को विकास के टारगेट पर ले जाने के बजाए जिला प्रशासन ने पदस्थ जिम्मेदार अफसर पिछले कई समय से गोरखधंघे बाजों एवं अनेक क्षेत्र के माफियाओं का संरक्षणदाता बन गया है जिसके कारण इस आदिवासी अंचल की हालत आर्थिक रुप से दिन प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है। प्रशासन के जवाबदेह अधिकारी उसी जगह पर अपना दिमाग लगा रहे है जहां सेटिंग के मामले उन्हें नजर आ रहे है। ऐसी स्थिती में जिले का विकास पूरी तरह से ठप हो चुका है। और धीरे धीरे यह अंचल प्रशासनिक मिलीभगत के सहारे माफियाओं के लि ए अवैध गढ़ बनता जा रहा है।
                                   प्रजातंत्र अखबार न्यूज बाय आशुतोष पंचोली

पिछले दिनों प्रशासनिक अमले के द्वारा ड्रग माफियाओं के खिलाफ सघन कार्रवाई का अभियान चलाया गया था जिसमें ड्रग के दो थोक माफिया सुनिल एंड सुनिल के यहां  छापा कार्रवाई में एक्सपायरी डेट की दवाईयों का भारी जखीरा मिला। प्रशासन द्वारा तीखे तेवर दिखाते हुए कार्रवाई तो की गई लेकिन 24 घंटे बाद अचानक यह कार्रवाई ऐसे रास्ते पर पहंुच गई जिसमें नाटकीय ढंग से जिन ड्रग माफियाओं के लायसेंस निरस्त किए गए थे उनके लायसेंस बहाल कर प्रशासनिक अमले के जिम्मेदार अफसरों ने पुनः इस गोरखधंघे को एक प्रकार से हरी झंडी दे दी। जहां एक ओर प्रशासन की इस कार्रवाई पर सवालिया निशान लग गए वहीं गोरखधंघे बाज अपनी नई कार्यप्रणाली के साथ में फिर से जुट गए है।
प्रजातंत्र अखबार न्यूज बाय आशुतोष पंचोली

कैसे हो गए लायसेंस बहाल?
इस मामले में सबसे बड़ा पहलू यह सामने आ रहा है कि एक ओर जहां पर प्रशासन ने टीम बनाकर ड्रग माफियाओं की दुकानों पर जाकर एक्सपायरी डेट की दवाईयां जब्त कर उनके लायसेस निरस्त कर दिए किंतु मात्र कुछ समय बाद ही इनके लायसेंस कैसे बहाल हो गए है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस मामले में ड्रग माफियाओं के द्वारा अपने अपने लायसेस बहाल करने की एवज में जिम्मेदार अफसरों को भारी वजन से नवाजने के कारण उनके द्वारा कार्यवाही शिथिल कर दी गई और इनके लायसेंस तत्काल बहाल भी कर दिए। इस वजह से सुनिल एंड सुनिल की पौ बारह हो गई। चूंकि दोनों ड्रग माफियाओं की सेटिंग जिम्मेदार अफसरों से हो जाने पर अब ये दोनों ड्रग माफिया निरंकुश व बैखोफ होकर वापस से अपनी एक्सपायरी डेट की दवाईयों को बेचकर लाखों रुपए की कमाई करने में लिप्त हो गए है। इन तथ्यों के बीच आमजनता के बीच यह सवाल खड़ा हुआ है कि लायसेंस निरस्त होने के बाद इतनी जल्दी कैसे बहाल हो गए है। जाहिर है कि इस मामले में एक बड़ा लेन देन हुए बिना लायसेंस बहाल नहीं हो सकते है। इस मामले को लेकर अब यह  पूरा मामला जिला पत्रकार संघ की ओर से सीएम हेल्प लाईन में शिकायत की जा रही है।
चौथासंसार न्यूज बाय रघु कोठारी

एक बार की जांच के बाद बंद हो गई कार्रवाई
प्रशासन ने इस पूरे मामले में सिर्फ एक बार की जांच की ओर उसके बाद ये कार्रवाई बंद कर दी है इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े हो गए है। जबकि पूरे जिले में कई थोक ड्रग डीलर है जो कि एक्सपायरी डेट की दवाईयों को फर्जी चिकित्सकों को बेच रहे है। ऐसी स्थिती में जिला प्रशासन अब क्या आगे की कार्रवाई करेगा इसको लेकर भी संशय बना हुआ है क्यों कि हमारे सूत्र बताते है कि सुनिल एंड सुनिल ड्रग माफियाओं के द्वारा अपनी दुकानदारी चलाने के लिए लाखों रुपए का  लेनदेन कर अपने लायसेंस बहाल करवा लिए इससे इस पूरे मामले की तस्वीर सामने आ गई है कि प्रशासन अब इस मामले में आगे की कार्रवाई अब नहीं करेगा। इस मामले को लेकर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को भी अपना रुख स्पष्ट करते हुए क्षेत्र की गरीब आदिवासी जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले सुनिल एंड सुनिल के खिलाफ एक्शन मोड में आना चाहिए।
                                               पत्रिका न्यूज बाय आशीष अगाल
  
फर्जी चिकित्सकों के खिलाफ नहीं हो रही कार्रवाई
वजन की एवज में दबे हुए अफसर अपने ही कलेक्टर की नहीं सुन रहे है। सूत्रों ने बताया कि जिला पत्रकार संघ की बार बार शिकायत के बाद कलेक्टर मैडम ने इस मामले में जिले के फर्जी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश टीएल बैठक में दे चुकी है इसके बाद भी जिम्मेदार विभाग के अफसर आंखे मंूद कर बैठे हुए हैं। इससे फर्जी चिकित्सकों के हौंसले बुलंद हो चुके है। एक ओर सुनिल एंड सुनिल से इन फर्जी चिकित्सकों की निरंतर एक्सपायरी डेट की दवाईयां मिल रही है वहीं दोनों ने इन फर्जी चिकित्सकों की सेटिंग भी जिम्मेदार अफसरों से करवा कर उनको संरक्षण भी दे रहे है। जिसके चलते कलेक्टर मैडम के आदेश को उनके ही मातहत अफसर घोल कर पी गए है। 

कलेक्टर का वर्जन:
मैं अभी बाहर से ही आई हूं इस पूरे मामले को कल फिर से दिखवाती हूं, प्रशासन नियमानुसार अपनी कार्यवाही करेगा।
- सुरभी गुप्ता, कलेक्टर अलीराजपुर
Share on WhatsApp