जिले में घटिया व नकली खाद बेचकर आदिवासी किसानों के साथ हो रही खुलेआम लूट

 खाद के नाम पर बेचा जा रहा डोलोमाइट व मिट्टी,
 दस रुपये की थैली 360 रुपए तक में बेची जा रही है
रघु कोठारी/ आशुतोष पंचोली
अलीराजपुर न्यूज।
आदिवासी अंचल के अलीराजपुर, झाबुआ व धार जिले सहित अन्य जिलों में अमानक स्तर का खाद विक्रय करने का धंधा खरीफ से लेकर रबी फसल दोनों के भरपूर सीजन के जोरों पर चल रहा हैं। इस मामले में जिला प्रशासन व कृषि विभाग का अमला पूरी तरह से उदासीन बना हुआ हैं। आदिवासी जिलों में अमानक स्तर का खाद बेचकर खाद बनाने वाली मेघनगर की एक कंपनी ने करोड़ों रुपए कमाने का गोरखधंधा चला रखा हैं। खाद निर्माण के निर्धारित मानक मापदंडों के विपरीत खाद में सिर्फ 50 फीसद स्फूर तत्व मिलाकर बाकि पूरी मिलावट कर उसमें डोलामोईट, मिटटी आदि डालकर एसएसपी सिंगल सुपर फास्फेट बनाया जा रहा है और उसे खुले बाजारों में धड़ल्ले से बेचने का काम अफसरों की मिलीभगत से जमकर किया जा रहा है। एक तो खाद की बोरी में 50 फीसद की मिलावट और प्रति बोरी केंद्र सरकार की 150 रुपए की सब्सीडी लेकर खाद बेचने में सौ फीसदी मुनाफे का धंधा बड़ी सेटिंग से चलाया जा रहा है। न कोई देखने वाला है और ना ही कोई जांच करने वाला है इस वजह से अलीराजपुर सहित अन्य जिलों में कई समय से यह गोरखधंधा चल रहा है जिसमें खाद निर्माण कंपनी, थोक डीलर, रीटेलर आदि जमकर मुनाफाखोरी करते हुए गरीब, नादान किसानों को अमानक स्तर का खाद बेच रहे है।
मेघनगर में बनता है एसएसपी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एसएसपी याने सिंगल सुपर फास्फेट खाद मेघनगर की एक फेक्ट्री में एग्रो फास नाम से बनाकर अंचल में बेचा जा रहा है। इस फेक्ट्री के कर्ता धर्तागण सुहाने ब्रदर्स इंदौर व मूल निवासी यूपी के बताए जा रहे है। जिनके द्वारा खाद निर्माण कर साल भर तक गरीब आदिवासी किसानों से इस ढंग से कमाई की जा रही है।कई किसानों ने इस मामले में शिकायत भी कृषि विभाग व जिला प्रशासन से की है कि सिंगल सुपर फास्फेट खाद डालने के बाद भी खेतों में जमीन की उर्वरा शक्ति नहीं बढ़ रही है।यहां तक कि नकली व अमानक स्तर के खाद से फसलों की पैदावर प्रभावित हो रही है।खाद में तय मात्रा में रासायनिक तत्व नहीं होते है। इससे किसानों को ज्यादा खाद खेतों में डालना पड़ रही है।
मामले की शिकायत पीएमओ से लेकर ईडी तक
इस मामले में जिले के किसान संगठनों व जागरूक किसानों के द्वारा बताया गया कि एसएसपी बनाने वाली इस कंपनी के मालिकों द्वारा इंदौर सहित यूपी में नकली खाद बेच कर अकूत संपत्ति एकत्रित कर ली है जिसकी शिकायत आदिवासी किसानों के हित में मय प्रमाण के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय कृषि मंत्री ,मध्य प्रदेश सीएम शिवराज सिंह चौहान को की गई है जिस पर कार्यवाही होने की उन्हें पूर्ण उम्मीद है। यदि उक्त कंपनी के द्वारा घटिया और नकली खाद बेचना बंद नहीं किया गया तो इनके खिलाफ जिले में आंदोलन भी किया जाएगा जिसमें आदिवासी किसानों के संगठन अन्य संगठनों का भी साथ लिया जाएगा।
पीटूओफाईव की मात्रा 16 फीसद चाहिए
कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एसएसपी खाद में पीटूओफाईव याने स्फूर तत्व की मात्रा 16 फीसद होना चाहिए किंतु उक्त खाद कंपनी के द्वारा सिर्फ 8 फीसद पीटूओफाईव डालकर अमानक स्तर का खाद खुले बाजार में विक्रय किया जा रहा है।इससे किसानों का डबल नुकसान हो रहा है।एक तो खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ नहीं रही है और दूसरी ओर पूरी कीमत देना पढ़ रही है। इस खाद की एक बोरी दानेदार फार्म में 360 रुपए व पावडर फार्म में 315 रुपए में मिल रही है। जबकि इसकी लागत मूल्य बेची जानी वाली कीमत का 50 फीसद भी नहीं है।
सब्सीडी के खेल में मिलता है पूरा मुनाफा
विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले में एसएसपी खाद जिस ढंग से बेचा जा रहा है उसमें सब्सीडी का पूरा खेल भी रचा बसा हुआ है।मामला यह है कि खाद में सिर्फ 50 फीसद स्फूर तत्व याने पीटूओफाईव ही डाला जाता है जिस पर खाद की लागत एक बोरी की करीब 150 से 180 रुपए तक होती है और प्रति बोरी निर्माण पर भारत सरकार के द्वारा 150 रुपए की सब्सीडी भी दी जाती है इस प्रकार से खाद निर्माण करने वाली कंपनी को एक खाद की बोरी की लागत शून्य से लेकर 30 रुपए तक ही बैठती है और खुले बाजार में खाद की बोरी 315 व 360 रुपए में बेची जा रही है। इस अनुसार यह स्पष्ट तौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि खाद निर्माण करने वाली कंपनी कितना मुनाफा कमा रही है।
नहीं होती है जांच
मिली जानकारी के अनुसार जिले के कृषि विभाग व जिला प्रशासन द्वारा आज दिनांक तक एसएसपी खाद की गुणवत्ता  की जांच ही नहीं करवाई गई हैं। जिसके चलते आदिवासी अंचल के किसान पूरी तरह से ठगे जा रहे है। इनकी सुनवाई करने वाला भी कोई नहीं है। ऐसे में जिले का किसान जाए तो कहां जाए मजबूरी में किसान उंचे दामों पर अमानक स्तर का खाद खरीदने को मजबूर है।
जनप्रतिनिधियों को देते है लाखों का चंदा
इस पूरे गोरखधंधें में अमानक स्तर का खाद बनाने वाली कंपनी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने के पीछे कई सारे कारण है। जिसमें से एक प्रमुख कारण यह है कि खाद निर्माण कंपनी के द्वारा संसदीय क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को लाखों रुपए का चंदा उनकी मांग पर दिया जाता है।जिसके चलते खाद कंपनी को जनप्रतिनिधियों का संरक्षण मिला हुआ है।इसलिए अभी तक इस प्रकार की कोई भी जांच कार्रवाई आज दिनांक तक नहीं की गई है। इसलिए आदिवासी अंचल का किसान तो ठगा जाएगा ही।


एसएसपी खाद की शिकायत मिलने पर हमारे द्वारा तुरंत कार्रवाई की जाती है। जिले के कई खाद व्यापारियों के लायसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की गई है।

- केसी वास्केल डीडीए कृषि विभाग।

 अलीराजपुर न्यूज के द्वारा मेघनगर की उक्त खाद कंपनी के संचालकगण सुहाने ब्रदर्स से उनका पक्ष जानने के लिए हमारे द्वारा उनके मोबाईल पर संपर्क किया गया किंतु उन्हौंने काल रीसीव नहीं की।

शेष अगली किश्त में पढ़िएगा . . . . . . . बने रहिए अलीराजपुर न्यूज के साथ।
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