हरियाली अमावस पर रोपे पौधे

घर की छत पर ही तैयार करते हैं प्रतिवर्ष 10 से 12 पौधे तैयार
उदयगढ़ से राजेश जयंत की रिपोर्ट
श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरियाली अमावस्या के रुप में जाना जाता है।यह एक प्रकार से भारतीय पर्यावरण दिवस है।यह दिन खेती-किसानी करने वालों के लिए भी महत्वपूर्ण होता है।इस दिन पौधरोपण का विशेष महत्व है।इसी को दृष्टिगत रखते हुए नईदुनिया व अलीराजपुर न्यूज़ पोर्टल के संयोजन में सोमवार हरियाली अमावस को  उदयगढ़  एवं  पांडव कालीन हनुमान मंदिर परिसर ग्राम बन में पौधारोपण किया गया।पूर्व शिक्षक एवं वरिष्ठ पत्रकार पीएस जयंत,गायत्री परिजन आरआर खोडे, सामाजिक कार्यकर्ता केरमसिंह मुवेल, कमलेश जयंत, रचित जैन,व्याख्याता बीपी पटेल आदि ने उदयगढ़ में एक त्रिवेणी तैयार की।  
पूर्व में बनाई गई त्रिवेणी में जहां कोई एक पौधा नहीं चला वहां उसे पुनः रोपकर त्रिवेणी  पूर्ण की गई। इसी तरह ग्राम बन में स्थित पांडव कालीन हनुमान मंदिर/आश्रम परिसर मे नारियल, केले, खारक के पौधे लगाए गए।वटवृक्ष आरआर खोड़े ने अपने घर तैयार किए वहीं खारक, केले एवं नारियल के पौधे पीएस जयंत ने अपने घर की छत पर तैयार किए।इस परिवार द्वारा प्रतिवर्ष नई नई किस्म के 10 से 12 पौधे घर की छत पर ही गमलों में तैयार कर विभिन्न अवसरों पर इन्हें अच्छी जगह रोपने का क्रम लंबे समय से चला आ रहा है। युवा पीढ़ी भी इनका अनुसरण कर इस पुनीत कार्य में जुड़ने लगी है। बच्चे भी शहर इसमें शामिल होते हैं।
श्री राम मंदिर के पुजारी पंडित गोविंद जी शर्मा ने इस विषय में कहा कि हरियाली अमावस्या के दिन पौधारोपण करना शुभ माना जाता है। वैसे भी पेड़-पौधे हमारी आस्था के साथ ही जीवन शक्ति से जुड़े हुए हैं। अलग-अलग पेड़-पौधों में विभिन्न देवताओं का भी वास माना जाता है।
जैसे पीपल वृक्ष में त्रिदेव के साथ ही अन्य देवताओं का वास माना गया है। इसी तरह केला और आंवला वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। वट वृक्ष का रोपण एवं पूजन  से पितृ देव प्रसन्न होते हैं। हरियाली अमावस पर खास पौधे लगाने और उनकी पूजा करने से शुभ फल के साथ ही ईश्वर की कृपा भी प्राप्त होती है।

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