अनलाक-2 में शिक्षा विभाग में बड़े फेरबदल से हुई गहमा गहमी,
पूर्व एमएलए के पीए भी बने भाबरा के बीआरसी,
बीआरसी की नियुक्तियों में पर्दे के पीछे से चली राजनीतिक गोलबंदी
आशुतोष पंचोली
अलीराजपुर न्यूज। ब्यूरो चीफ
जिले के शिक्षा विभाग में सोमवार 6 जुलाई को डीपीसी व डीईओ सीके शर्मा ने तीन आदेश ऐसे जारी किए जिससे कि कोरोना वायरस अनलाक-2 में गहमा गहमी मच गई। मामला था जिले के कुछ छह विकासखंडों में से तीन विकासखंडों सोंडवा, जोबट व भाबरा के बीआरसी बदलने का सो इन तीन विकासखंडों में जिन शिक्षकों को नियुक्त किया गया है उसकी कई फोरम पर चर्चाओं और बहस का दौर आरंभ हो गया। हालांकि ये चर्चा सिर्फ सतही ही रहने वाली है। इसका कोई व्यापक व निर्णायक असर होगा इसकी कोई आशा नहीं है। डीपीसी व डीईओ दो पद एक साथ संभाल रहे सीके शर्मा द्वारा जारी आदेश में सोंडवा बीआरसी पद पर उदयगढ़ के शिक्षक धर्मेेंद्र कटारा, जोबट बीआरसी पद पर फूलमाल के शिक्षक कमल राठौड़ व भाबरा आजादनगर के बीआरसी पद पर वही के शिक्षक व जोबट के पूर्व विधायक माधोसिंह डावर के पीए रहे राजेंद्र बैरागी को नियुक्त किया है। जिले में एक साथ तीन बीआरसी को बदलने से शिक्षा विभाग के अंदरखाने में हलचल मचना स्वाभाविक ही था सो हलचल मची और काफी गहमा गहमी भी हुई किंतु इन नियुक्तियों के पीछे जो शक्तियां है उनका स्मरण आते ही विरोध करने का सोचने वालों ने खामोश रहने में ही अपनी भलाई समझी। अब भले ही इन नियुक्तियों में जिन नियमों, मापदंडों, योग्यता का अनुभव आदि आधारभूतों तथ्यों का पालन हुआ हो या न हुआ हो इससे शिक्षा विभाग की सेहत पर क्या असर होगा यह तो आने वाले समय ही बताएगा।
सोंडवाः भंगुसिंह तोमर की जगह धमेंद्र कटारा
जिले के सबसे बड़े विकासखंड सोंडवा में कांग्रेस सरकार के दौरान माध्यमिक शिक्षक भंगुसिंह तोमर को बीआरसी बनाया गया था। तोमर ने अपने कार्यकाल के दौरान औसतन अच्छा काम किया और कर रहे थे उनके स्थान पर अब उदयगढ़ विकासखंड में पदस्थ माध्यमिक शिक्षक धर्मेद्र कटारा को बीआरसी नियुक्त किया गया है। सूत्रों ने बताया कि धमेंद्र कटारा पूर्व में वालपुर क्षेत्र में तैनात रह चुके है उन्हें सोंडवा क्षेत्र की भौगोलिक पृष्ठभूमि का ज्ञान है। बीआरसी रहे भंगुसिंह की सीधे तौर पर भाजपा के जनप्रतिनिधियों से पटरी नहीं बैठना भी उन्हें हटाने का एक कारण बताया जा रहा है। कई फोरम पर वे आमने सामने भी हो चुके है। साथ ही भाजपा संगठन के जिले एक बड़े पदाधिकारी की पसंद को यहां तवज्जों दी गई है। कटारा की सोंडवा बीआरसी बनाने में वर्तमान बीईओ रामानुज शर्मा की भूमिका भी परदे के पीछे से बताई जा रही है कि कैसे उन्हौंने बीआरसी पद पर अपने अनुकूल व कार्य करने वाले शिक्षक का नाम सुझाया।
जोबटः प्रवीण प्रजापत की जगह कमल राठौड़
जोबट बीआरसी पद पर कमल राठौड़ की नियुक्ति बेहद चैंकाने वाली रही। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सरल, स्वभाव व अपनी मिलनसारिता के लिए सभी के लिए सुलभ व सजग रहने वाले कमल राठौड़ ऐसे व्यक्ति है जिसने अपनी कार्यशैली, तौर तरिकों व सामाजिक व रचनात्मक कार्यों से दोनों दलों में अपने मित्र बना रखे है। उनके नाम पर भाजपा व कांग्रेस दोनों के खास जनप्रतिनिधियों से हरी झंडी ही मिलती जिसका फायदा उनको मिला व उन्हें यह बीआरसी पद मिला। हालांकि कठ्ठीवाड़ा विकासखंड में वे कई समय से शिक्षकों के वेतन सहित उनके कई प्रकार के प्रशासकीय कार्यों को कई सालों से बखूबी अंजाम देते आ रहे है। जिसका अनुभव उन्हें इस पद तक पहंुचाने में सहायक रहा। हालांकि कुछ फोरम पर राठौड़ को प्राथमिक शिक्षक बताया गया है और उनकी नियुक्ति पर बहस व चर्चाएं भी छिड़ी और यह राठौड़ का मायनस पाईंट बताया गया किंतु जब नियुक्ति आदेश उपर से ही निकला है तो बीरआरसी बनाने की कोई तो वजह होगी ही।
भाबरा आजादनगरः शैलेंद्र डावर की जगह राजेंद्र बैरागी
भाबरा के बीआरसी पद पर राजेंद्र बैरागी की नियुक्ति में किसी प्रकार का कोई संशय दिखाई नहीं दे रहा है। कई समय तक वे जोबट क्षेत्र के विधायक रहे माधोसिंह डावर के पीए के पद पर काम करते रहे है। सो जाहिर है कोई न कोई तो नजराना उन्हें भाजपा सरकार की वापसी के बाद मिलना ही था। हालांकि बैरागी भी सौम्य सरल व्यवहार के व्यक्ति है। विधायक का पीए रहकर कई प्रकार के अनुभव उन्हें मिल ही चुके है और उपर से शिक्षक तो है ही तो यह मौका उनके लिए बीआरसी पद की सौगात लेकर आया। यहां से शैलेंद्र डावर को हटाया गया हालांकि ये भी सब की सुनकर ही चल रहे थे किंतु जिले के असरदार कांग्रेस नेता परिवार से उनकी रिश्तेदारी होना भी उन्हें कही न कही प्रभावित कर गया।
अंत में यह चर्चा भी केंद्र में है कि बीआरसी की नियुक्तियों में पर्दे के पीछे से राजनीतिक गोलबंदी भी बताई जा रही है। जिले के शिक्षा विभाग में हुए इस बदलाव में कलेक्टर सुरभि गुप्ता के निर्देश पर जिस प्रकार से डीपीसी सीके शर्मा ने आदेश जारी किए है उससे यह तो स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि भले ही जिले का प्रशासन इसे साधारण व नियमित प्रक्रिया के तहत बदलाव करने की प्रक्रिया बताए किंतुु जिले का प्रशासनिक महकमा अब भाजपा नेताओं, जनप्रतिनिधियों के तवज्जों व तरजीह दे रहा है। क्यों कि इन नियुक्ति के पीछे तो यही दिखाई दे रहा है।
बोलो भारत माता की जय



