कृषि अमले के दो जवाबदेह अधिकारी हुए गायब

एक पहुंचा धामनोद, दूसरा इंदौर
आशुतोष पंचोली / रघु कोठारी 
आलीराजपुर न्यूज।
जिले में यूरिया खाद की हो रही कालाबाजारी को लेकर बड़ी धूम मची हुई है ठीक वहीं ऐसे वक्त में कृषि अमले के दोनो जवाबदेह अधिकारी अपने दायित्व से मुह मोड़ते हुए गायब हो गए। क्योंकि इस मामले में पिछले 4 दिनो से जिले की सक्रिय मीडिया ने पूरे मामले का पर्दाफाश करते हुए खाद विक्रय में हो रही कालाबाजारी को उजागर किया है। जिसके चलते एक अधिकारी धामनोद पहुंच गया और दूसरा अधिकारी इंदौर के लिए निकल गया है। जिला मुख्यालय पर यूरिया खाद को लेकर जिस प्रकार से अफरा तफरी का माहौल चल रहा है बेलगाम यूरिया व्यापारी उंचे दाम पर किसानों को खाद बेचने से नहीं चूक रहे है वहीं दूसरी और जवाबदेह अधिकारियों का जिला मुख्यालय छोडऩा संदिग्धता प्रदान करता है। समाचार पत्रो में प्रकाशित समाचारो के बावजूद प्रशासनिक अमले से बगैर घबराए निर्भिक होकर जिस प्रकार से यूरिया खाद को व्यापारियों ने अपनी कमाई का जरिया बनाकर जिस प्रकार से धांधली मचाई जा रही है उससे यह साबित होता है कि प्रशासन की निष्क्रियता और जवाबदेह अधिकारियों की सांठगांठ के चलते मप्र शासन के दिशा निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है।
सीसीबी की 26 सोसायटियां संदेह के घेरे में
विदित हो कि ग्रामीण क्षेत्रो में व्यापारियों के अलावा शासन के द्वारा सोसायटियों के माध्यम से भी यूरिया खाद विक्रय करने की व्यवस्था का प्रबंध है जिसमे शासन द्वारा निर्देशित ८० व २० के फार्मूले के तहत किसानों व थोक दुकानदारो को खाद का आबंटन किया जाना है इस मामले में मप्र शासन किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के प्रमुख सचिव अजित केसरी ने गत ९ जून को जारी अपने आदेश में निर्देशित किया है कि प्रबंध संचालक मप्र राज्य सरकारी विपणन संघ मर्यादित के प्रस्ताव पर अपर मुख्य सचिव सह कृषि उत्पादन आयुक्त मप्र शासन की अध्यक्षता में बैठक ५ जून में लिए गए निर्णय अनुसार मप्र राज्य सरकारी विपणन संघ मर्यादित संघ द्वारा यूरिया का भंडारण नियत लक्ष्य अनुसार सुनिश्चित किए जाने के लिए भारत सरकार द्वारा प्रदेश में कुल उपलब्ध यूरिया उर्वरक को सरकारी क्षेत्र में ८० प्रतिशत एवं नीजि क्षेत्र में २० प्रतिशत के अनुपात में वितरण किया जाए जिसके तहत जिले की २६ सोसायटियों को जिले में आवंटित खाद किसानों को विक्रय के लिए दिया जा रहा है। किंतु सोसायटियों में किसानों के नहीं पहुंचने पर उक्त खाद अवैध ढंग से व्यापारियों को सोसायटी के कर्मचारी सांठ गाठ कर बैच रहे है जिसे व्यापारी वर्ग बाजार में उचे दामो पर देकर गाड़ी कमाई कर रहे है। इसम मामले में किसानों के आधार कार्ड दुरूपयोग किया जा रहा है।
गरीब किसानों का शोषण बंद होकर होनी चाहिए जांच
सीसीबी के जवाबदेह अधिकारी इस मामले से अपनी दूरी बनाते हुए मीडिया को जानकारी देने से बच रहे है। कुछ ने तो अपनी मोबाइल की सीम तक बदल दी है। २६ सोसायटियों में जिस प्रकार से मप्र शासन के आदेशों को रददी की टोकरी में फैककर अपना हित साधने वाले इन अधिकारियो ने सोसायटियों को सेवा से भटकाकर अपनी जेबो को गरम करने का हथियार बना लिया है जिसकी वजह से आज आदिवासी किसानों को कोरोना के तहत लॉक डाउन के चलते डबल मार पड़ रही है। तीन माह तक ये गरीब किसान घर पर ही बैठे रहे और लॉक डाउन खत्म होते ही बोवनी के समय यूरिया खाद की कालाबाजारी ने अघोषित रूप से खुलेआम इनकी जेब काट डाली। मामले की जांच करवाना चाहिए ताकि गरीब किसानों को लूट से बचाया जा सके।

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