सावधान..! गुजरात सीमा से आते मजदूरों की आपाधापी, कहीं कोरोना संक्रमण का दाग न लगा दे हमारे ग्रीन झोन पर

चाँदपुर बेरियर से आलीराजपुर-झाबुआ के मात्र 250, शेष 3000 से अधिक, अन्य जिलों के मजदूरों का आगमन हुआ अभी तक
कोटा से छात्रों को लाने की तर्ज पर, अपने मजदूरों को खुद लेकर आए विभिन्न जिला प्रशासन
कट्ठीवाड़ा से प्रेम गुप्ता की स्पेशल रिपोर्ट
 लॉकडाउन 2.0 की समय सीमा समाप्त समाप्त होने को है,  किंतु मजदूरी के लिए पलायन किए मजदूरों का वापस अपने -अपने क्षेत्रों की ओर आने की रेलम पेल अभी भी लगी हुई है।  प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में गुजरात से होकर होकर मध्य प्रदेश में मजदूरों का आना जारी है। मजदूरों की इस आपाधापी में जिले पर कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।  मजदूरों के आगमन से यदि कोविड19 का संक्रमण हमारे यहां फैलता है तो कोरोना से रातदिन एक कर लड़ने वाले हमारे जिले के कोरोना योद्धाओं की मेहनत पर पानी फिर सकता है। इन योद्धाओं की सतत मेहनत से ग्रीन जोन में आए हमारे क्षेत्र को फिर से संक्रमण का दाग भी लगने की संभावना है।
 हमारे जिले के मात्र 250, अन्य जिलों के 3000 मजदूर आए
गौरतलब है कि गुजरात से मध्यप्रदेश में प्रवेश द्वार चांदपुर बैरियर से प्रतिदिन सैकड़ों मजदूर मध्यप्रदेश में आ रहे हैं।  किंतु विशेष यह है कि इस सीमावर्ती क्षेत्र से गत सात दिवस में आलीराजपुर-झाबुआ के लगभग 250 ग्रामीण मजदूर ही गुजरात से आए, वहीं प्रदेश के दूसरे जिलों कटनी,  दमोह, सीधी,खरगोन,खंडवा, मुरैना, ग्वालियर, भिंड से 3000 से अधिक ग्रामीण वापस आए। इन सारे ग्रामीणों को चांदपुर बैरियर पर गुजरात शासन के द्वारा लाकर छोड़ दिया गया।  अनेक मजदूर पैदल चलकर भी आ रहे हैं,जहां से आलीराजपुर जिला प्रशासन द्वारा वाहनों का इंतजाम कर उनके क्षेत्रों में भेजा जा रहा रहा है। 
मजदूरों की आपाधापी से संक्रमण का खतरा
इस दौरान उन मजदूरों को चांदपुर के शासकीय छात्रावास भवन ठहराया जा रहा है। वहीं पर उनके चाय, नाश्ते, पानी की सुविधा की की गई की गई है। जनप्रतिनिधि उनसे आकर मुलाकात कर रहे कर रहे मुलाकात कर रहे आकर मुलाकात कर रहे कर रहे मुलाकात कर रहे कर रहे हैं इस सारी कवायद में कहीं ना कहीं यह डर भी फैला हुआ है की हजारों मजदूरों में से कहीं कुछ थोड़े से भी संक्रमित मजदूर आ गए गए तो हमारे यहां पर भी संक्रमण विकराल रूप धारण कर सकता  है। खतरा हमारे उन कोरोना वारियर्स को भी है,जो दिन रात इन मजदूरों की स्क्रीनिंग में लगे हैं उनके भोजन पानी की सुविधाओं में लगे हैं उनकी विभिन्न जानकारियों को दर्ज करने में लगे हुए है।  


कोटा मॉडल से मजदूरों को लेकर आएं
सीमा से मजदूरों के आगमन पर निगाह रखने वाले  विश्वसनीय सूत्रों और कोविड19 के जानकारों के अनुसार राज्य प्रशासन को   सीमा पर मजदूरों को एकत्र करना उनकी स्क्रीनिंग करना जैसी प्रक्रियाओं को करने की बजाय उन्हें सीधे लोकेटेड क्षेत्रो से लाकर उनके गृह जिलों की ओर रवाना कर देना चाहिए। वहीं पर उनकी उचित स्वास्थ्य संबंधी जांच की प्रक्रिया को अपनाकर प्रक्रिया को अपनाकर क्वॉरेंटाइन  सुनिश्चित करना चाहिए। जिससे राज्य की सीमाओं पर  मजदूरों की रेलम पेल भी नहीं बचेगी और इन मजदूरों को सुरक्षित और संवेदनशील तरीके से उनके गृह क्षेत्रों की ओर भेजा जा सकेगा। इसे कोटा से छात्रों को लाने की विभिन्न राज्य सरकारों की रणनीति की तरह अपनाना होगा जिसमें विभिन्न जिला प्रशासन की सहभागिता हो।  

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