*प्रकृति हमें देती है सब कुछ-हम भी तो इसे कुछ देना सीखे, *
एसडीएम डीएसपी तहसीलदार ने रोपे पौधे,
सीबीएमओ ने दिलाई कोरोना मुक्ति की शपथ
उदयगढ़ से राजेश जयंत।
विश्व पृथ्वी दिवस पर सारा विश्व महामारी कोरोना को रोकने के लिए लाकडाउन है। रेल, सड़क, जल और वायु परिवहन थमा हुआ है। विषैले काले धुएं का गुबार उड़ाते कारखाने रुके हुए हैं।
शांत वातावरण में चिड़िया की चहक पक्षियों का कलरव मिठास घोल रहा है । प्रकृति अपने मूल स्वरूप की ओर लौटने लगी है। पंजाब प्रांत के जालंधर से 200 किलोमीटर दूर हिमाचल की पहाड़िया भी साफ दिखाई देने लगी है। नदियों में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ी है । महानगरों की प्रदूषित हवा सांस लेने के लायक बनी है । पृथ्वी में होने वाली कंपन में 30 से 50 फ़ीसदी तक कमी आई है। यह साफ जाहिर करता है कि बिगड़ते पर्यावरण के लिए मनुष्य ही सबसे बड़ा दोषी है।
*अधिकारियों ने लगाए पौधे- दिया संदेश*
लाकडाउन के दौरान ही पौधे लगाएं-वृक्ष बचाएं अभियान अंतर्गत डीएसपी आशीष पटेल ने थाना परिसर में पौधारोपण किया। सीबीएमओ डॉ अमित दलाल ने स्वास्थ्य केंद्र परिसर में लगे पौधों को पानी दिया। अपनी टीम को कोरोना को हराने का संकल्प दिलवाया। एसडीएम किरणसिंह आंजना, तहसीलदार वंदना किराडे ने भी पौधारोपण कर सृष्टि को बचाने का संदेश दिय। इस संवाददाता के माध्यम से अधिकारियों ने जनता के बीच अपनी बात रखी।
*उप पुलिस अधीक्षक आशीष पटेल* ने जन समुदाय से कहा कि सृष्टि को बचाना किसी एक व्यक्ति, एक देश, एक सरकार का दायित्व नहीं है। पृथ्वी हम सभी की है तथा हम सभी को मिलकर इसके संरक्षण में अपना सकारात्मक योगदान देना है । प्रण ले कि हम व्यक्तिगत-सार्वजनिक स्वच्छता को अपनाएंगे पेड़-पौधे, जीव जंतुओं का ध्यान रखेंगे, प्राकृतिक संतुलन बनाने में योगदान देंगे।
*एसडीएम किरणसिंह आंजना* ने कहा कि इस लाकडाउन में प्रकृति ने अपने मूल स्वरूप में आकर जो स्वच्छ सुंदर वातावरण निर्मित किया है अब लोगों की जिम्मेदारी है कि वह सब मिलकर इसे यूं ही बरकरार रखें । उन्होंने बताया कि वायुमंडल की पहली परत के ठीक ऊपर पाई जाने वाली परत ओजोन पराबैगनी किरणों को पृथ्वी तक नहीं आने देती है। ये पराबैगनी किरणें हमारी आंखों और त्वचा को बड़ा नुकसान पहुंचाती हैं। कैंसर तक कारण बनती है अतः संकल्प ले कि पर्यावरण को संरक्षित कर आने वाले कल को बेहतर बनाएंगे।
*सीबीएमओ डॉ अमित दलाल* ने संदेश दिया कि गंदगी ही समस्त बीमारियों की जड़ है। व्यक्ति स्वयं एवं अपने आसपास का वातावरण साफ सुथरा रखें। जरूरत के अनुरूप/अनुकूल ही प्राकृतिक संसाधनों का दोहन एवं उपयोग करें । उन्होंने कहा कि प्रकृति हमें सब कुछ देती है यदि हम उसे कुछ लोटा नहीं सकते तो कम से कम उसे नुकसान तो ना पहुंचाएं।


