आपूर्ति नहीं होने से अन्य सामानों के साथ ही स्लोपाइजन भी महंगा हुआ
आम्बुआ से गोविंदा माहेश्वरी की रिपोर्ट
कोरोनावायरस के कारण क्षेत्र में लागू लॉक डाउन की सख्ती के कारण अनेक रोजमर्रा की कई सामग्रीयो की आपूर्ति नहीं हो पा रही है जिस कारण अनेक सामानों के साथ ही स्लोपाइजन भी मंगा हो गया है। एक ओर प्रदेश व जिले में लाक डाउन सख्ती से लागू है वही रोजमर्रा की आवश्यक खाने पीने की वस्तुओं के साथ ही शौक फरमाने व वाले आयटमों जिन्हें स्लोपाईजन भी कह सकते है बेहद महंगे हो गए है और इनकी भी कालाबाजारी जमकर हो रही है।
जैसा की विदित है कि विश्व स्तर पर जानलेवा कोरोनावायरस के फेल जाने के कारण भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है यहां भी बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हुए हैं कुछ ठीक हो रहे हैं मगर कहीं अपनी जान गवा चुके हैं अभी इसकी कोई दवा नहीं बनी है केवल सावधानी ही बचाव का तरीका माना जा रहा है इसी बचाव अस्त्र के लिए संपूर्ण देश के साथ ही मध्यप्रदेश में भी लाॅक डाउन किया गया जिस कारण आवागमन बंद होने से अनेक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है। लगभग सभी तरह की रोजमर्रा की सामग्री वाहन से नहीं आ पा रही है। इन्हीं में क्षेत्र में प्रमुखता के साथ खाए जाने वाले स्लोपाइजन कहे जाने वाले पान, गुटखा, तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी आदि की आपूर्ति नहीं होने से इनके भाव आसमान पर चढ़ गए हैं।बीडी सिगरेट पान गुटखा खाने वालो शौकिनों ने बताया कि पान मसाला तंबाकू सहित इसका एक पैकेट 120-25 में मिल रहा था तथा उसकी खेरची बिक्री ₹5 की थी स्थिति यह है कि एक पैकेट ₹200 के पार होकर खेरची बिक्री 8 से ₹10 पाउच हो गया है । इसके खाने के शौकीन या तो कहें कि इसकेे खाने के आदी हो चुके लोग इस महंगे स्लोपाइजन को भी ढूंढ कर खाने को मजबूर है इसी के साथ-साथ बीड़ी सिगरेट आदि जो कि इनकी स्लोपाइजन ही कहा जाता है भी महंगे होने के समाचार है।
विशेषः
हालांकि अलीराजपुर न्यूज पोर्टल नशे की वस्तुएं बीड़ी, सिगरेट, पान मसाला, तंबाखू आदि खाने का समर्थन बिलकुल नहीं करता है और नागरिकों से अनुरोध भी करता है कि नशे की वस्तुओं का सेवन नहीं करे। तंबाखू सिगरेट का सेवन जानलेवा व कैंसर रोग का कारक होता है।
