20 सितंबर को आदिवासी रेत ठेकेदारों एवं ग्रामीणों का विशाल जंगी प्रदर्शन

प्रदेश शासन की नई रेत नीति का करेंगे विरोध
गिरिराज मोदी
अलीराजपुर न्यूज। सिटी रिपोर्टर 
 प्रदेश कांग्रेस सरकार ने जब से नई रेत उत्खनन नीति लागू करने का निर्णय लिया तब से आदिवासी बहुल आलीराजपुर जिले में आदिवासी रेत ठेकेदार एवं ग्रामीणों में हाहाकार मचा हुआ है। ये लोग इस नीति के विरोध में उतर पडे है। जिला कांग्रेस कमेटी एवं रेत बचाओं संघर्ष समिति के अध्यक्ष महेश पटेल सहित सभी आदिवासी ठेकेदारों एवं ग्रामीणजनों से इस नीति को आदिवासियों का गला घोंटने वाली नीति बताया है। इस रेत नीति के विरोध में आगामी 20 सितंबर को रेत बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले आलीराजपुर में विशाल जंगी प्रदर्शन आयोजित होगा। इस दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ के नाम से कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा। 
रेत बचाओ समिति का किया गठन
रविवार को जिला मुख्यालय पर महेश पटेल की उपस्थिति में जिले के अनेक आदिवासी रेत ठेकेदार ओर इस व्यवसाय से जुडे गा्रमीणजन एकत्र हुए ओर एक आपातकालीन बैठक आयोजित की। इस बैठक में रेत बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया गया। इसमें संरक्षक भदू पचाया,अध्यक्ष महेश पटेल,उपाध्यक्ष गुमानसिंह हरवाल,गिलदारसिंह चौहान,कैलाश चौहान,कोषाध्यक्ष केरू पटेल,सचिव गोविंद परमार,सह सचिव बहादुरसिंह भिंडे एवं अन्य को सदस्य मनोनित किया गया है। 
आदिवासियों के आजीविका का माध्यम छीन जाएगा
समिति के अध्यक्ष महेश पटेल एवं पदाधिकारियों ने बताया कि मप्र शासन द्वारा हाल ही में पूरे प्रदेश में नई नीति लागु की गई है। इस नई रेत नीति से इस आदिवासी बाहुल्य जिले सहित पूरे प्रदेश को नुकसान होने का अंदेशा है। उल्लेखनीय है कि पूर्व की रेत नीति में अलग-अलग खदान के मान से ओपन खुली नीलामी होती थी। जिसमें छोटे, मंझले आदिवासीयों को रोजगार की उपलब्धता हो जाती थी। किंतु नई रेत नीति से ब्लॉक स्तरीय ऑनलाईन नीलामी का प्रावधान रखा गया है। जिससे बाहरी बड़े रसूखदार व्यापारीयो को व्यवसाय करने का मौका मिलेगा। किंतु इस जिले के गरीब आदिवासियों के रोजगार में कमी हो जाएगी। जिले के आदिवासियों के आजीविका हेतु रेत खनन एक प्रमुख साधन है जिससे उनके परिवार का भरण पोषण होता है। नई रेत नीति से इनके आजीविका का माध्यम छीन जाएगा।
रेत खनन नीति में होना चाहिए संशोधन 
पटेल ने बताया कि संविधान की पांचवी अनुसुची एवं पैसा एक्ट के तहत जनजातीय इलाके में खनिजों के खनन कार्य को बिना आदिवासी बहुल ग्राम सभाओं की अनुमति से नही किया जा सकता है। लेकिन सरकार की वर्तमान खनन नीति आदिवासी इलाकों में बिना आदिवासियों से खनन किया जाएगा। साथ ही जो नीति बनाई गई है उसमें कोई भी आदिवासी रेत खनन प्रकिृया में भाग नही ले सकेगा। क्योंकि आनलाईन टेंडर से करोंडों रूपए का निवेश होगा। इसे वहन करने के लिए कोई भी गरीब आदिवासी सक्षम नही है। इस कारण नई रेत खनन नीति में संशोधन होना चाहिए। ताकि आदिवासी बहुल जिले के आदिवासियों को रेत खनन का कार्य एवं रोजगार उपलब्ध हो सकें। बैठक में समिति के पदाधिकारियों और आदिवासी ग्रामीणों ने बाहरी ठेकेदार भगाओ ओर जिले के आदिवासियों का जीवन बचाओ जैसे जमकर नारे लगाए। महेश पटेल ने बताया कि आदिवासी जन जीवन विरोधी इस नई रेत नीति के विरोध में 20 सितम्बर को जिला मुख्यालय पर गांव गांव से हजारों की संख्या में आदिवासी ग्रामीण एकत्र होंगें ओर विशाल जंगी प्रदर्शन करेेंगें।
फोटो केप्शन अली 5-नई रेत नीति का विरोध करते हुए पटेल व अन्य।
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