असाडा राजपूत समाज का आयोजन, गणगौर माता को बिदाई दी

मातारानी की भक्ति में थिरके भक्तगण, युवाओं में विशेष उत्साह 
नगर के प्रमुख मार्गो से भव्य चल समारोह निकला 
आशुतोष पंचोली
आलीराजपुर। ब्यूरो चीफ
स्थानीय असाडा राजपूत समाज द्वारा शुक्रवार को गणगौर माता का विर्सजन श्रद्धा और आस्था के साथ धूमधाम से किया गया। श्री सर्वेश्वर महादेव मंदिर एवं श्री अम्बे माता मंदिर असाडपुरा में क्रमशः 37 व 25 कुल विराजित 62 गणगौर माता की विधि विधान से पूजा-अर्चना की गई। उसके बाद राक्सा नदी में जवारों का विर्सजन किया गया। सैकडों की संख्या में समाज के लोगों ने चल समारोह में भाग लेकर शोभा बढ़ाई, समाज के अध्यक्ष राजेश सिंह जे.वाघेला व मीडिया प्रभारी उमेश वर्मा द्वारा बताया गया कि असाडा राजपूत समाज द्वारा यह पर्व श्रावण मास की शीतला सप्तमी से पूर्णिमा तक प्रतिदिन सुबह व शाम को पूजा अर्चना कर मनाया जाता है। इस पर्व में मध्यप्रदेश के अलावा विदेश से तथा गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, आदि प्रान्तों से भी समाजजन, श्रद्धालु भाग लेने के लिए आते है। पूर्णिमा को रतजगा कर गरबे, भजनों पर  भक्तगण  आंनद लेते है व अगले दिन गरबा नृत्य व माताजी के भजनों के साथ जवारों का विर्सजन किया जाता है।
 रियासत काल के समय से माता की स्थापना करने की परम्परा प्रचलित है। माताजी की स्थापना करने वाले भक्त गजेन्द्रसिंह राठौर, हिरेन्द्रसिंह चावडा व हेमन्तसिंह सिसौदिया व लाला भाटी ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी कार्य में बाधा आने पर मनौती ली जाती है एवं जिसके पूर्ण होने पर मन्नतधारियों द्वारा लगातार दो वर्ष तक माताजी की स्थापना की जाती है एवं कुछ भक्तों द्वारा अनवरत परम्परा अनुसार माताजी की स्थापना होने से उनके द्वारा प्रतिवर्ष स्थापना की जाती है। विर्सजन के पहले माता को सभी स्थानकों व भक्तों के घर पर ले जाकर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
असाडपुरा मोहल्ले में दोपहर 12 बजे से माता पूजन व विसर्जन के लिए समाजजनों में उत्साह व्याप्त था, सर्वप्रथम अम्बे माता मंदिर असाड़पुरा में विराजित 25 गणगौर माता की विधि विधान से पूजा-अर्चना कर असाडपुरा के मार्गो से चल समारोह प्रारंभ हुआ, जो जिन भक्तों द्वारा माताजी की स्थापित किये गये थे, उनके निवास पर माताजी के डोल व जवारे की आरती उतारी व प्रसादी वितरित की गई। उसके पष्चात् दोपहर 3 बजे  श्री सर्वेश्वर महादेव मंदिर में विराजित 37 गणगौर माता की विधि विधान से पूजा-अर्चना की गई व चल समारोह प्रारंभ होकर जिन श्रद्वालुओं  द्वारा माताजी की स्थापित किये गये थे, उनके निवास पर भी पूजा-अर्चना की गई। दोनों मंदिर से प्रारंभ चल समारोह शिवाजी मार्ग पर एकत्रित हुए, यहाॅ पर सभी ने बारी - बारी से महाआरती व प्रसादी वितरित की। 
शाम लगभग 6 बजे एक साथ गणगौर माता का विर्सजन जुलूस निकला। समाज की अनेक युवतियंा व महिलाऐं आकर्षक परिधानो से सजी थी, जो माताजी को सिर पर लिए चल रही थी। सबसे आगे युवा धार्मिक भजनों धुनों व गरबों पर नृत्य कर चल रहे थे एवं भक्तगण चवर ढुला रहे थे।
चल समारोह एमजी रोड से होकर राजवाडा प्रांगण पहूंचा । यहंा कुछ देर के लिए माताजी को विश्राम दिया गया जहाॅ रियासत काल में राजा द्वारा पूजा-अर्चना की जाती थी उसी परम्परा का निर्वाह करते हुए आरती अर्चना की गई, इसके बाद चल समरोह राजराजेश्वर शनि मंदिर पर माताजी को विश्राम व अर्चना, महाआरती, प्रसादी पश्चात सुक्कड नदी में जवारों का विर्सजन किया गया। जिसमें सैकडों की संख्या में समाजजनों ने सहभागिता की। महोत्सव को सफल बनाने में असाड़ा राजपूत समाज के युवाओं, महिलाओं और पुरूषों सहित अनुसांगिक संगठनों का भी सराहनीय सहयोग रहा। समाज की ओर से पदाधिकारियों नेे कार्यक्रम में सहभागिता हेतु सभी का आभार  माना। 



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