गाय को पूजने से सभी देवताओ की पूजा हो जाती है- पंडित शिवगुरू शर्मा


शिव महापुराण कथा में शिव जलन्धर युद्ध की सुनाई कथा,झुमकर नाचे श्रद्धालु 

आशुतोष पंचोली
आलीराजपुर।ब्यूरो चीफ
 गाय जगत की माता है। गाय में 33 कोटी देवताओं का वास है। एक गाय को पूजने से समस्त देवी-देवताओं की पूजा हो जाती है। गाय हमारे धर्म की, जड है, जड है जब तक वृक्ष है। उसी प्रकार जब तक गौमाता सुरक्षित है तब तक धर्म सुरक्षित है हमारे लिए शर्म की बात है की हम विवाहों मैं व अपने पर लाखों रूपए खर्च करत है। मंदिरो में 56 भोग का प्रसाद लगाते है, और गौमाता भूखी भटक रही है, हम बंगलों-महलो मे बैठे है, गाय धूप में तप रही, बरसात में भीग रही है। प्लास्टिक-पोलीथीन खाकर मर रही है। हम पूरे परिवार को पालते है किन्तु एक गाय नही पाल पा रहे है। हमारे घर से हम प्रतिदिन एक रोटी भी गाय के लिए नही निकाल पा रहे है। शानों-शौकत पर लाखों खर्च कर देते है। गौषाला हेतू दान नही दे पाते है। आयुर्वेद में भी गौमूत्र-गोबर का चिकित्सा में उपयोग बताया गया है। पंचगण्य बगैर पूजा-पाठ, हवन आदि कुछ भी संभव नही है। यह बात स्थानीय पंचेश्वर महादेव मंदिर पर चल रही शिव महापुराण कथा मे व्यसपीठ से पंडित शिवगुरू शर्मा ने कहीं। 

दुखियों जरुरतमंदों की सेवा और मदद करों
पंडित शर्मा ने मनुष्य के दु:ख पर चर्चा करते हुए बताया कि मनुष्य की अनंत इच्छाए ही दुख का कारण है। व्यक्ति की हर इच्छा पूरी नही होती है। मनुष्य दूसरों को देखकर दुखी है। हर व्यक्ति को कुछ न कुछ दुख अवश्य रहता है। कोई तन दुखी तो कोई मन दुखी कोई संतान दुखी, संतान है तो दुखी है, नही है तो दुखी, कोई धन दुखी तो कोई पड़ोसी को सुखी देखकर दुखी। मनुष्य का मन नही भरता कल झोपडी में सुखी था तो आज महल में भी सुखी नही कभी फर्श बदलाता है, तो कभी रंग-रोगन, कभी फर्निचर बदलाता है। कोई क्या कहेगा इस पर भी मनुष्य दुखी हो जाता है। उन्होंने कहा कि दान करने से धन की शुद्धि होती है दान करों मगर सामर्थ अनुसार दान करो,घर बेच कर तिरथ मत करो। दुखियों जरुरतमंदों की सेवा करो मदद करों, ईश्वर के आगे मस्तक झुकाओं, मागों मत उसे आपकी सभी आवश्यकता ज्ञात है, वह बिन मांगे देगा। 

शिव जालंधर युद्ध जीवतं हो गया
कथा के दौरान सब सेठो मे सावलिया सेठ बाकी सब डुप्लिकेट कहते हुए प्रभलीला का वर्णन करते हुए शिव जलन्धर युद्ध की कथा आज सुनाई गई। शिवजी द्वारा जालंघर वध का चित्रण झाकियो के माध्यम से किया गया। शिव व जलंधर पात्र की आकर्षक रचना सुन्दर श्रृंगार माली समाज की चांदनी, सीमा, रंजना, मंजुला, संगीता ने किया। पाण्डाल में शिव जलंधर युद्ध जीवतं हो गया। आरती एवं प्रसादी की व्यवस्था मुख्य यजमान परिवार सागर वंशिय माली समाज, राठौर महिला मण्डल ने किया। इस दौरान पंडित शिवगुरु का संम्मान भी किया गया। इस अवसर पर पंडित शर्मा द्वारा सुनाए गए भजनों पर उपस्थित श्रद्धालुगण झुमकर नाचने लगे। उक्त जानकारी कार्यक्रम की व्यवस्था संयोजन नियंत्रण निरंजन मेहता ने दी।
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