आलीराजपुर जिले की जोबट विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस नेताओं में मचा जमकर घमासान,


कांग्रेस विधायक कलावती भूरिया व पूर्व विधायक सुलोचना रावत के खेमे में बंटी कांग्रेस,
भाजपा को लोकसभा चुनाव में मिल सकता है फायदा
आशुतोष पंचोली
आलीराजपुर। ब्यूरो चीफ
जिले की दो विधानसभा सीटों में से इन दिनों जोबट विधानसभा सीट दो दिनों से बेहद सुर्खियों में है। गत विधानसभा चुनाव में दोनों सीट कांग्रेस ने जीती थी। अब लोकसभा चुनाव के समय और मतदान के पहले जोबट विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के अंदरुनी संगठन में जो हलचल मची है उसके आरंभिक संकेत कांग्रेस के लिए बिलकुल अच्छे नहीं कहे जा सकते है। दरअसल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से बगावत कर कांग्रेस प्रत्याशी कलावती भूरिया के सामने निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले पूर्व विधायक व मंत्री सुलोचना रावत व उनके पुत्र विशाल रावत दोनों को कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया था। चूंकि लोकसभा चुनाव सामने है जिसके चलते इन दिनों का निष्कासन रद्द कर इन्हें वापस कांग्रेस में लिए जाने की प्रदेश संगठन की पहल का विधायक कलावती भूरिया व उनके समर्थक कार्यकर्ता व संगठन के पदाधिकारी पुरजोर विरोध दर्ज करा रहे है।जोबट विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं व नेताओं के साथ सभी ब्लाक अध्यक्षों व कार्यकर्ताओं ने तो अपने इस्तीफे की धमकी भी दे डाली है। उनका कहना है कि यदि पूर्व विधायक सुलोचना रावत व विशाल रावत को कांग्रेस में लिया जाता है हम कांग्रेस को छोड़ देंगे। अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं व प्रदेश संगठन व नेताओं को यह दुविधा हो गई है कि क्या करे क्या ना करे ? हालांकि इस मामले में अभी कोई अंतिम निर्णय प्रदेश संगठन ने नहीं लिया है। जिससे इस बारे में अभी कुछ कहना व लिखना जल्दबाजी होगी।

 यही घमासान जोबट विधानसभा में दो दिनों से चल रहा है। विधायक भूरिया समर्थक और पूर्व विधायक सुलोचना रावत व विशाल रावत के समर्थक इस मामले को लेकर आमने सामने हो गए हैं। हालांकि विशाल रावत ने अलीराजपुर न्यूज को बताया कि लोकसभा चुनाव में हमारी भूमिका क्या रहेगी इसका निर्णय हम 30 अप्रेल को अपने कार्यकर्ताओं की मीटींग के बाद लेंगे। किंतु हम विधायक कलावती भूरिया का नेतृत्व कतई स्वीकार नहीं करेंगे, क्यों कि वे बाहरी है। वही दूसरी ओर विधायक कलावती भूरिया का कहना है कि जिन्हौंने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को नुकसान पहंुचाया उन्हें कांग्रेस में वापस लेने का हम विरोध करेंगे। हालांकि विशाल रावत ने अपनी फेस बुक वाल पर अभी भी यूथ कांग्रेस अध्यक्ष जोबट विधानसभा लिख रखा हैं। 


जिले में अब यह मामला पूरे संसदीय क्षेत्र की राजनीति में चर्चा के केंद्र में आ चुका है। क्यों कि लोकसभा चुनाव में जोबट विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस के लिए खासा महत्वपूर्ण है। आदिवासी बहुल आलीराजपुर जिले में कांग्रेस संगठन व नेताओं के अच्छे दिन तो विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद से ही आ गए किंतु जिस ढंग से इस विधानसभा सीट में विधायक कलावती भूरिया ने दो दिनों से अपने तेवर दिखाए है और दूसरी ओर पूर्व विधायक सुलोचना रावत व विशाल रावत अपनी प्रतिक्रिया दे रहे है उससे कही ऐसा न हो कि जोबट विधानसभा सीट पर कांग्रेस को मिलने वाली बढ़त और जीतने की संभावनाओं पर शंकाओं के बादल कही छा ना जाए। क्यों कि विधानसभा चुनाव में भी विशाल रावत अपने बूते पर 32 हजार मत निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में लेकर आए थे और कांग्रेस प्रत्याशी कलावती भूरिया बमुश्किल 3 हजार से कम मतों से चुनाव जीती थी। कही भाजपा नेताओं व संगठन ने रावत परिवार को साध लिया तो हो सकता है कि जोबट विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस कुछ खास कमाल नहीं दिखा सके हालांकि यह अभी सिर्फ आकलन व पूर्वानुमान है किंतु राजनीति में सब कुछ संभव है कब पराए अपने हो जाते है और कब अपने पराए हो जाते है इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है। राजनीति अनिश्चितताओं का खेल बन चुकी है। 
भाजपा की है पूरे घटनाक्रम पर निगाहें
जिले की जोबट विधानसभा क्षेत्र में दो दिनों से चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम पर भाजपा संगठन व उसके चुनाव प्रभारी व वरिष्ठ नेताजन नजरे गढ़ाए हुए है। भाजपा सीधे तौर पर कांग्रेस नेताओं की आपसी लड़ाई का फायदा उठाने की रणनीति पर काम करना आरंभ कर चुकी है। भाजपा की ओर से अंदरुनी तौर पर जोबट में होने वाली हर उठापठक पर अपना ध्यान केंद्रीत किया हुआ है। यदि यह मामला वोटिंग के पूर्व तक यूं ही चलता रहा तो भाजपा को आंशिक तौर पर इसका लाभ मिलेगा किंतु उसके लिए भाजपा को कई सारे समीकरण अपने स्तर से सेट करना पड़ंेगे। इसके लिए भाजपा के प्रदेश नेताओं व रणनीतिकारों से स्थानीय नेतृत्व को संयुक्त योजना बनाकर उस पर काम करना होगा। 
50 साल तक कांग्रेस में प्रभावी रहा है रावत परिवार 
जिले की जोबट विधानसभा सीट पर करीबन 50 से रावत परिवार कांग्रेस में प्रभावी भूमिका में रहा है। पूर्व विधायक सुलोचना रावत के ससुर स्वर्गीय अजमेर सिंह रावत जोबट विधानसभा सीट पर 6 बार विधायक रहे है। वहीं उसके बाद सुलोचना रावत भी तीन बार विधायक रह चुकी है। रावत परिवार की जोबट विधानसभा क्षेत्र में एक बेल्ट में आज भी प्रभावी पकड़ बनी हुई है।
ये कांग्रेस है यहां सब चलता है
जिले की राजनीति पर विशेष तौर पर नजर रखने वाले कई राजनीतिज्ञों से इस प्रतिनिधि ने बात की तो इस मामले पर उनका कहना था कि ये कांग्रेस पार्टी है यहां सब चलता है। टेक ईट इजी रहिए कुछ ही दिनों में सब मामला सेट हो जाएगा और रावत परिवार को कांग्रेस पार्टी के लिए काम करना पड़ेगा यदि काम नहीं भी करेंगे तो वे सांसद कांतिलाल भूरिया के खिलाफ भी वे नहीं जाएंगे। बहरहाल यह सब भविष्य के गर्त में छिपा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष महेश पटेल भी इस पूरे मामले को गंभीरता से देख रहे है उनका कहना है कि हर राजनीतिक पार्टी में नेताओं के बीच असंतोष रहता है, प्रतिस्पर्धा रहती है। इस मामले को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताजन सुलझा लेंगे। 
इनकी भी सुनेः
हमारा कांग्रेस में जाने का कोई प्रश्न नहीं है। अभी तो सिर्फ कांग्रेस में हमारी वापसी की सूचना भर से कांग्रेस विधायक भूरिया व नेताओं में हमारे नाम से ही घबराट हो रही है। हम सरपंच चुनाव की लड़ाई नहीं लड़ रहे है। जोबट से किसी स्थानीय नेता को टिकट देकर लड़ाते तो हम विरोध नहीं करते किंतु बाहरी प्रत्याशी का हम विरोध करेंगे। हमने कांग्रेस की 50 सालों तक सेवा की है। हमारे बराबर कांग्रेस पार्टी की किसी ने सेवा नहीं की है। लोकसभा चुनाव में क्या करना है इसका निर्णय हम 30 तारिख को कार्यकर्ताओं की बैठक लेकर करेंगे।
- विशाल रावत


जिन्हौंने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी का विरोध किया, निर्दलीय चुनाव लड़े उन्हें कांग्रेस में लेने से गुटबाजी होगी जिससे कांग्रेस संगठन पर असर होगा। कांग्रेस पार्टी ने रावत परिवार को सालों तक मौका दिया है। मुझे जनता ने चुना है, चुनाव जीती हुूं बाहरी प्रत्याशी का कोई मुद्दा ही नहीं बनता है।
- कलावती भूरिया विधायक जोबट


सभी फाईल फोटो है।
Share on WhatsApp