राजेश जयंत
शास्त्रों मे इस एकादशी का है सर्वाधिक महत्व
डोल ग्यारस के अतिरिक्त इसे पद्मा एकादशी, जलझूलनी एकादशी, परिवर्तिनी एकादशी, पद्मा एकादशी, वामन एकादशी भी कहा जाता है। श्री राम मंदिर के पूजारी पं. गोविन्दजी शर्मा ने बताया कि शास्त्रों में इस एकादशी कासर्वाधिक महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु और उनके आठवेंअवतार भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा की जाती है। इसी दिन माता यशोदा ने जलवा पूजन किया था। चातुर्मास के दौरान अपने शयनकाल में इसी दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं। डोल ग्यारस के दिन राजा बलि से भगवान विष्णु ने वामन रूप में उनका सर्वस्व दान में मांग लिया था एवं उसकी भक्ति से प्रसन्न् होकर अपनी एक प्रतिमा राजा बलि को सौंप दी थी। इसी वजह से इसे वामन एकादशी भी कहा जाता है। यह पद्मा एकादशी के नाम से भी प्रसिद्ध है। पद्मा माता लक्ष्मी का एक नाम है। इस दिन जो व्यक्ति एकादशी का व्रत करता हैउस पर मां लक्ष्मी अपना संपूर्ण वैभव लुटा देती है। पं. गोविन्दजी शर्मा ने कहा कि जीवन में मान-सम्मान, प्रतिष्ठा, पद, धन धान्य की प्राप्ति के लिए यह एकादशी प्रत्येक मनुष्य को करना चाहिए।
उदयगढ़। निप्र
गुरुवार को उदयगढ़ में डोल ग्यारस पर्व उल्लास केसाथ मनाया गया। स्थानीय मंदिर में श्री राम दरबार व बालगोपाल का भव्य श्रंगार कर उन्हे मेवा मिष्ठान राजभोग अर्पित किया गया। रथ पर चांदी के पालने में बाल गोपाल श्री कृष्ण को विराजित कर गाजे बाजे/भजन-कीर्तन, गरबा नृत्य के साथ नगर भ्रमण करवाया गया। रास्ते में जगह जगह डोल में विराजित भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरुप की भक्तों ने पूजा अर्चना की और डोल यात्रा का भव्य स्वागत अभिनन्दनकिया। दशामाता भक्त मंडल, मयुर क्लब ने फलाहार करवाया। पांच घंटे के नगर भ्रमण पश्चात बाल गोपाल को पंचामृत से स्नान, अभिषेक करवा कर महाआरती की गई। बडी संख्या में महिला, पुरुष, बच्चे, वृद्धजन इस धार्मिक आयोजन में शामील हुए।![]() |
| रथ पर चांदी के पालने में सवार बाल गोपालभगवान श्री कृष्ण |
शास्त्रों मे इस एकादशी का है सर्वाधिक महत्व
डोल ग्यारस के अतिरिक्त इसे पद्मा एकादशी, जलझूलनी एकादशी, परिवर्तिनी एकादशी, पद्मा एकादशी, वामन एकादशी भी कहा जाता है। श्री राम मंदिर के पूजारी पं. गोविन्दजी शर्मा ने बताया कि शास्त्रों में इस एकादशी कासर्वाधिक महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु और उनके आठवेंअवतार भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा की जाती है। इसी दिन माता यशोदा ने जलवा पूजन किया था। चातुर्मास के दौरान अपने शयनकाल में इसी दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं। डोल ग्यारस के दिन राजा बलि से भगवान विष्णु ने वामन रूप में उनका सर्वस्व दान में मांग लिया था एवं उसकी भक्ति से प्रसन्न् होकर अपनी एक प्रतिमा राजा बलि को सौंप दी थी। इसी वजह से इसे वामन एकादशी भी कहा जाता है। यह पद्मा एकादशी के नाम से भी प्रसिद्ध है। पद्मा माता लक्ष्मी का एक नाम है। इस दिन जो व्यक्ति एकादशी का व्रत करता हैउस पर मां लक्ष्मी अपना संपूर्ण वैभव लुटा देती है। पं. गोविन्दजी शर्मा ने कहा कि जीवन में मान-सम्मान, प्रतिष्ठा, पद, धन धान्य की प्राप्ति के लिए यह एकादशी प्रत्येक मनुष्य को करना चाहिए।

