जिला व सत्र न्यायालय ने महिला पटवारी को 2500 रुपए की रिश्वत के मामले में सुनाई जेल की सजा



पुलिस ने गिरफ्तार कर भेजा जेल, रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथों पकड़ा था 
आशुतोष पंचोली 
आलीराजपुर। ब्यूरो 
न्यायालय-जिला एवं सत्र न्यायाधीश महोदय आलीराजपुर ने एक महिला पटवारी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 में धारा 07 में एक वर्ष का कारावास एवं धारा 13(1)डी सहपठित 13(2) में चार वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। जिले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत किसी महिला आरोपी को सजा का यह पहला मामला हैं। जो कि बेहद जनचर्चा में  है। जैसे ही न्यायालय ने आरोपी महिला पटवारी को सजा सुनाई। उसे महिला पुलिस ने गिरफ्तार कर तुरंत जेल भेज दिया। न्याय क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार चूंकि सजा 3 साल से अधिक की है इसलिए आरोपी महिला को यहां जमानत नहीं मिली। अब उसे माननीय उच्च न्यायालय में जमानत के लिए आवेदन देना होगा। 

क्या था मामलाः
नईदुनियालाईव को मीडिया सेल प्रभारी अभियोजन कार्यालय, न्यायालय परिसर एडीपीओ श्री एमएस वसुनिया ने बताया कि फरियादी दिलीप चोंगड़ निवासी बेहड़वा थाना सोरवा से  पटवारी विनिता अमलीयार ने फरियादी के गांव में जमीन की नप्ती की पावती बनाने के लिए 2500 रूपये की मांग की थी। जिसकी शिकायत फरियादी चौंगड़ ने लोकायुक्त पुलिस को इंदौर को की थी। जिस पर लोकायुक्त पुलिस के निर्देश पर रंग लगे नोटों को फरियादी दिलीप चौंगड़ द्वारा पटवारी विनिता अमलीयार को 2000 रूपये की रिश्वत बतौर उनके निवास काजू विकास मार्ग पर जाकर दिये थें। लोकायुक्त पुलिस द्वारा पटवारी विनिता अमलीयार को फरियादी से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ दिनांक 22 जुलाई 2015 को  पकड़ा था। लोकायुक्त पुलिस इंदौर द्वारा सम्पूर्ण प्रक्ररण का अनुसंधान कर विशेष सत्र न्यायालय आलीराजुपर में आरोपी पटवारी विनिता अमलीयार के विरूद्व अभियोगपत्र पेश किया था। विशेष लोकायुक्त पुलिस इंदौर द्वारा दर्ज इस प्रकरण में अभियोजन की ओर से फरियादी दिलीप चौंगड़ एवं लोकायुक्त पुलिस के साक्षियों द्वारा रिश्वत की मांग तथा रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ने का न्यायालय में समर्थन किया था। आज दिनांक 20 सितंबर 18 को निर्णय पारित करते हुए विशेष सत्र न्यायालय आलीराजपुर द्वारा आरोपी  विनिता अमलीयार पटवारी को धारा 07 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 में एक वर्ष का सश्रम कारावास एवं 2 हजार रूपये का अर्थदण्ड तथा धारा 13(1)डी सहपठित 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 में चार वर्ष का सश्रम कारावास  एवं 5 हजार रूपये का अर्थदण्ड की सजा सुनाई गई।  प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी श्री पी.एस.अहोरिया अति.जिला लोक अभियोजन अधिकारी आलीराजपुर द्वारा की गई । 
जिले में भ्रष्टाचार चरम पर 
जानकारी के अनुसार जिले के शासकीय तंत्र में पिछले कई सालों से भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है। भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार बनता जा रहा है। हालांकि जिला प्रशासन इस पर अंकुश लगाने व भ्रष्ट आचरण करने वाले कर्मचारियों, अफसरों आदि पर नकेल कसने का मुस्तैदी से कार्य कर रहा है। किंतु उसमें अभी आंशिक तौर पर सफल हो पा रहा है। गत सप्ताह भ्रष्टाचार व कदाचरण के मामले में कलेक्टर श्री गणेशशंकर मिश्रा खनिज निरीक्षक श्री चैनसिंह डामोर को निलंबित कर चुके है। जिले के अन्य कई सरकारी विभागों में भी इसी प्रकार नकेल कसने की आवश्यकता है। जिले के पशु चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, परिवहन, पीएचई, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क, आरईएस, जल संसाधन, महिला व बाल विकास, आदिवासी विकास विभाग, पंचायत व ग्रामीण विकास जैसे प्रमुख विभागों में इन दिनों शासन की कई योजनाओं को जिम्मेदार अफसर भ्रष्टाचार करते हुए इन योजनाओं का पलीता लगाने में लगे हुए हैं। जिन पर जिला प्रशासन को गंभीरता से नजर रखते हुए कार्रवाई करना होगी। तभी जिले की ग्रामीण जनता को शासन की योजनाओं का सही लाभ मिल सकेगा। 
Share on WhatsApp