श्री चारभुजा जी के होंगे छह विशेष श्रृंगार, श्रद्धा और आस्था का बड़ा केंद्र है खट्टाली का श्री चारभुजाजी मंदिर
राजेश डुडवे/जयेश मालानी
जोबट/खट्टाली। श्री चारभुजा धाम खट्टाली में इस वर्ष भी देव झुलनी एकादशी महोत्सव 20 सितम्बर गुरुवार को बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा।इस हेतु अब सभी तैयारियां अन्तिम चरण मे है। इस अवसर पर भगवान श्री चारभुजा नाथ जी के 6 अलग-अलग श्रृँगार व 6 अलग-अलग रूपों के अदभुत दर्शन दिखाई देंगे।इस हेतु श्रद्धालुओं को दर्शन करवाने में श्रृँगार समिति के सदस्य श्री सीताराम सेन, कैलाश परवाल, प्रदीप पँवार, गोविंद सेन व जयेश मालानी करीब 1 माह से इन पोशाकों को बनाने में जुटे हुए हैं। पोशाकों की तैयारियां भी अन्तिम चरण पर चल रही है। देव झुलनी एकादशी महोत्सव को लेकर सार्वजनिक बैठक हुई। सार्वजनिक बैठक में सर्व समाज के श्रद्धालु उपस्थित थे इस बैठक में देव झुलनी एकादशी महोत्सव को बड़े धूमधाम से मनाने का निर्णय लिया गया। साथ ही कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी निर्णय लिया गया ।
विभिन्न समितियों का गठन
सभी समितियों को अपने दाईत्वो को सोँप कर अपने अपने कार्यभार मुर्तरुप प्रदान करने मे जुट गई है। समिति द्वारा इस तरह से प्रयास किया जाएगा कि बाहर से आने वाले सभी श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा ना हो इस हेतु विशेष ध्यान रखा जाएगा ।साथ ही इस बैठक में एक महत्वपूर्ण जानकारी वरिष्ठ कार्यकर्ताओं द्वारा दी गई। सभी श्रद्धालुओं तक यह खबर आनी चाहिए की हम भगवान श्री चारभुजा नाथ जी के जलवा पूजन कार्यक्रम में जा रहे हैं तो वहां पर जोखिम भरे गहने, अधिक रुपए व जिस चीज से श्रद्धालुओं को तकलीफ हो ऐसी कोई भी जोखम वाली वस्तु को इस मेले में ना लेकर आवे , ताकि किसी को किसी का भी नुकसान ना हो। महोत्सव में हाथी, घोड़े, बग्गी, DJ, बैंड आदि भगवान के चल समारोह मैं विशेष आर्कषण का केन्द्र रहेगें ।
फुल व गुलाल से सजेगी शोभायात्रा
चल समारोह का सारा आर्कषण रंग व सुगंधित गुलाल की छटा से आच्छादित रहेगा, शोभायात्रा मे पालकी मे विराजित भगवान के साथ जब श्रृध्दालु इसकी वर्षा करते है तो मानो इन्द्रधनुषसी छटा पर हर कोई "बलिहारी"हो कर भाव..विभोर हो उठता है।साथ ही धरती के साथ आसमान से भी ड्रोन हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की जाएगी जो माहौल को पूरी तरह अनुपम छटा से आलोकित करेगी। इस महोत्सव को सफल बनाने में चारभुजा धाम के सर्व समाज के श्रद्धालुओं कार्यकर्ता बड़ी लगन और मेहनत से अपना कार्य कर रहे हैं।
भगवान को लगेगा भोग ,बनाए जा रहे हैं विशेष रोट
शुद्ध घी से निर्मित होने वाले इन विशेष रोट की प्रक्रिया भी विशेष लोगों द्वारा ही संपन्न की जाती है इस रोट को बनाने के लिए राजस्थान के सांवरिया सेठ मंदिर क्षेत्र के कारीगर विशेष रूप से खट्टाली आते हैं तथा वही इसका निर्माण करते हैं प्रसादी के निर्माण में लगभग 1 सप्ताह का समय लगता है तथा इस प्रसादी का सभी श्रद्धालुओं को पूरे वर्ष भर इंतजार रहता है।
डोल ग्यारस के पर्व का उत्साह पल प्रतिपल बढ़ता ही जा रहा है 20 सितंबर गुरुवार को इस महापर्व की तैयारियां अब पूर्णता की ओर है वही घरों में भी आने वाले मेहमानों के लिए व्यवस्थाएं आकार लेने लगी है। ग्राम खट्टाली का पर्याय बन चूका डोल ग्यारस के लिए चारभुजा महोत्सव समिति के साथ ही सभी ग्रामवासी पूरे तन मन के साथ आयोजन के पूर्णता के लिए लगे हुए हैं । सोमवार को जिला पुलिस अधीक्षक विपुल श्रीवास्तव ने ग्राम खट्टाली का दौरा किया व मेला स्थल के साथ पूरी व्यवस्था के बारे में निर्देश दिए आपने चौकी प्रभारी को पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया आपके साथ एसडीओपी मोरे व थाना प्रभारी जगत सिंह रावत उपस्थित थे।
उमडेगा आस्था का सैलाब,उडेगी रंग बिरंगी गुलाल
कार्यक्रम की शुरुआत 20 सितंबर कल सुबह 5:30 बजे मंगला आरती से होगी पश्च्यात प्रभात फेरी निकाली जाएगी। ग्राम खट्टाली में मनाया जाने वाले डोल ग्यारस पर्व की तैयारियां पूर्ण हो चुकी है 20 सितंबर गुरुवार को ग्राम खट्टाली के चारभुजा मंदिर प्रांगण में आस्था का सैलाब हिलोरे लेगा इस हेतु चारभुजा महोत्सव समिति ने सभी तैयारियों को अंतिम रुप दे दिया है कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 5:30 बजे से हो जाएगी । 8:30 बजे श्रंगार आरती के पश्चात क्षेत्र से निकलने वाली पदयात्रा का ग्राम खट्टाली में प्रवेश शुरू हो जाता है ।तथा ग्राम की सड़कों पर आस्था का सैलाब प्रकट होने लगता है।दोपहर के ठीक पूर्व ध्वजारोहण होता है। ध्वजारोहण के पश्चात राजभोग आरती होती है,जिसमे भगवान को फलहारी छप्पन भोग लगाया जाता है। इस वक्त तक तो मानो गांव की सभी सडको पर भक्तो की भीड दिखाई देने लगती है। दोपहर 3.30 बजे उत्थापन आरती होती है,और आरती के ठीक पश्चात "आलकी के पालकी.. जय कन्हैया लाल की के जयघोष के साथ शुरू होता हे चल समारोह। जिसमे हाथी,घोडे,बग्घी पर भगवान चारभुजा नाथ निकलते हे,जलक्रिडा करने।
जुलुस के अग्रभाग मे भजनो की सुन्दर प्रस्तुती देते बेन्ड,नृत्य करते अश्व के पीछे होता है श्रध्दालुओ का सेलाब । इस माहौल मे उडती रंग बिरंगी गुलाल से सारा माहौल उस ऐतिहासिक दृश्य को उपस्थित कर देते है,जिसका लाभ लेने के लिए ना जाने कहाँ..कहाँ से लोग यहाँ पहुँचते है। ग्राम के प्रमुख मार्गो से गुजर कर यह काँरवा हथनी किनारे पहुँचता है,जहा होता है," भगवान का जलाभिषेक"कर भगवान को आलकी की पालकी के जय घोष के साथ नदी तट पर महा आरती का आयोजन किया जाता हे रंगीन फटाके की चमक बैंड की धुन श्रदालु का मन मोह लेती हे आरती के बाद पुनः चल समारोह चारभुजा मंदिर पहुँचता हे जहाँ पर महाआरती व महाप्रसादी का आयोजन किया जाता है ।रात्रि में शयन आरती के पश्च्यात केशरिया दूध की प्रसादी तथा देर रात्रि तक भजन का आयोजन किया जाता है ।
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