अव्यवस्थाओं का पर्याय बना आम्बुआ स्वास्थय केन्द्र

 जिला चिकित्साधिकारी बने उदासीन

आलीराजपुर न्यूज के लिए आम्बुआ से गोविंदा माहेश्वरी की रिपोर्ट।

आंबूआ स्वास्थय केन्द्र इन दिनों अव्यवस्थाओं का पर्याय बना हुआ है जिसके सुधार की कोई उम्मीद दिखाई नही दे रही हे लेकिन अवयवस्थाओ के दौरान जिला चिकित्सा अधिकारी की उदासीनता के कारण समस्या और विकराल होती जा रही है।

डॉक्टरों का आने का समय देरी से व जाने का समय जल्दी 

स्वास्थय केन्द्र पर कर्मचारी 99ः अन्य जगह से आते जाते है जिसके कारण कर्मचारी 9 बजे की बजाय 10 से 11 बजे तक आते है और शाम 5 बजे की जगह 4 बजे या उसके पहले ही निकल जाते हे जिसके कारण मरीजों को घंटो सुबह इंतजार करना पड़ता हे या शाम के वक्त कर्मचारियों ( डाक्टरों) के जल्दी चले जाने के कारण वापसी घर लौटना पड़ता है या अन्य किसी झोलाछाप डॉक्टर के यहा इलाज करवाना पड़ता हे 


लैब इंचार्ज कभी लैब में रहता ही नहीं

मिली जानकारी के अनुसार लैब इंचार्ज बारिया कभी लैब में रहता ही नहीं है व ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों से जांच करने हेतू शुल्क मांगता है ।

मरीजों के साथ होता हे अपमानजनक भाषा का प्रयोग 

ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों के साथ ठीक तरीके से बातचीत नहीं होती है उन्हे बहुत सी बार अपमनाजनक भाषा सुनना पड़ती है जिसके कारण ग्रामीण मरीज झोलाछाप डॉक्टरों के यहां जाना पसंद करते है।


आयुष विभाग के डॉक्टर लिख रहे एल्योपेथिक दवाई

जानकारी के अनुसार आयुष विभाग के डॉक्टर द्वारा एल्योपेथिक दवाई लिखी जा रही हे व दवाई दी भी जा रही है। करोड़ों की लागत से बना अस्पताल, प्रभारी मंत्री द्वारा उदघाटन भी कर दिया गया लेकिन आज तक शुरू नहीं हुआ’ लगभग 1 करोड़ 31 लाख में बना स्वास्थय केंद्र जिसका पिछले दिनों प्रभारी मंत्री द्वारा उदघाटन भी कर दिया गया लेकिन जिला चिकित्सा अधिकारी की उदासीनता के कारण आज तक उक्त स्थान पर शुरू नहीं हो पाया।

आखिर क्यों है  महोदय आंबुआ कर्मचारियों पर मेहरबान’ 

आम्बुआ स्वास्थय केंद्र की अनेक समस्याएं जिसको लेकर अनेक बार पत्रकार संघ आम्बुआ द्वारा सीएमएचओ डा प्रकाश  ढोके से शिकायत की लेकिन उनके द्वारा कभी उस समस्या पर गंभीरता से नहीं लिया गयां। 







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