जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष महेश पटेल के कांग्रेस से निष्कासन के मायने

कांग्रेस संगठन में महेश पटेल जैसी शख्सियत का स्थान लेने वाला कोई नहीं है, देर सवेर पार्टी को वापस लेना पड़ेगा 

बिना स्पष्टीकरण के निष्कासन की एकतरफा कार्रवाई से कांग्रेस में नाराजगी 

आशुतोष पंचोली

आलीराजपुर न्यूज। ब्यूरो चीफ

जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष महेश पटेल को शुक्रवार को कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष व संगठन प्रभारी चंद्रप्रभाष शेखर ने 6 साल से निष्कासित करने के आदेश मीडिया को जारी किए। हालांकि गुरुवार को जोबट के भगोरिया हाट में झाबुआ विधायक कांतिलाल भूरिया युवा कांग्रेस अध्यक्ष विक्रांत भूरिया के वाहनों के काफिले पर पथराव की घटना हुई और महेश पटेल के ग्राम बोरखड़ के एक युवक के कथित अपहरण का आरोप भी भूरिया परिवार पर लगा। मामला जोबट थाने तक एफआईआर की स्थिती तक जा पहंुचा। रात बीती सुबह हुई तो दिन चढ़ते ही भोपाल से कांग्रेस के दबंग नेता महेश पटेल के कांग्रेस से छह साल के निष्कासन की खबर सोशल मीडिया से लेकर तमाम राजनीतिक प्लेटफार्मो पर जमकर वायरल हुई। वैसे प्रदेश कांग्रेस संगठन ने बिना स्पष्टीकरण के निष्कासन की एकतरफा कार्रवाई की है इससे पूरे जिले के हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी व्याप्त हो गई है। देर सवेर यदि कांग्रेस प्रदेश संगठन ने अपना निर्णय नहीं बदला तो कांग्रेस को आने वाले दिनों में कई प्रकार की चुनौतियों से जूझना पड़ेगा। वरिष्ठ कांग्रेस नेताआंें का कहना है कि महेश पटेल के कांग्रेस से निष्कासन की एकतरफा कार्रवाई प्रदेश संगठन ने की है उन्हें उनकी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया हैं। सूत्र बताते है कि घटना के दौरान तो महेश पटेल मौके पर थे ही नहीं। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रदेश कांग्रेस संगठन ने यह निर्णय भूरिया जी के दबाव में आकर लिया है जो कि एकतरफा कार्रवाई के रुप में पूरे जिले में देखा जा रहा है। 




हालांकि अपने निष्कासन की सूचना के बाद के 8 घंटे तक महेश पटेल जी का कोई अधिकृत बयान मीडिया में अपनी प्रतिक्रिया स्वरुप नहीं आया है। जिले की कांग्रेस की राजनीति के इतिहास में संभवतया यह पहली बार ऐसा मामला हुआ है कि पटेल परिवार की राजनीतिक ताकत को इस ढंग से कम करने का काम कांग्रेस प्रदेश संगठन व झाबुआ-आलीराजपुर की कांग्रेस राजनीति में अपना प्रभाव व दखल रखने वाले कांतिलालजी भूरिया ने करवाया हो। आज से 18 साल पूर्व 2004 तक आलीराजपुर क्षेत्र में कांग्रेस की राजनीति के एकमात्र चमकते धूमकेतु स्वर्गीय वेस्ताजी पटेल थे जो कि महेश पटेल व अलीराजपुर विधायक मुकेश पटेल के पिता थे। महेश पटेल के कांग्रेस से निष्कासन के कई मायने है किंतु आलीराजपुर जिले की कांग्रेस राजनीति में  महेश पटेल जैसी शख्सियत का स्थान लेने वाले कोई दूसरा नेता तो फिलहाल कांग्रेस के पास नहीं है और ऐसा नेता मिलने में कांग्रेस को लंबा वक्त लगेगा। जिले की कांग्रेस राजनीति के अन्य सामान्य वर्ग के नेताओं का कहना है कि फिलहाल महेश पटेल की जो पोजीशन व आभा मंडल जिले की राजनीति में है उस स्तर का कोई अन्य नेता कांग्रेस पार्टी में कही दिखाई देता नहीं है। अपने राजनीतिक जीवन में आलीराजपुर मंडी अध्यक्ष, अविभाजित झाबुआ जिला पंचायत के उपाध्यक्ष पद, जिला युवक कांग्रेस अध्यक्ष जैसे पदों से आलीराजपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष के पद तक पहुंचने वाले महेश पटेल ने आलीराजपुर जिले में कांग्रेस संगठन को जीवित रखने में अपना जो योगदान दिया है वह कार्य अन्य कोई नेता नहीं कर सकता हैं। कहते है कि राजनीति में कोई मित्र व शत्रु नहीं होता है इसके बावजूद भी 2003 से लेकर 2021 तक अपने राजनीतिक जीवन में तीन चुनाव लड़ना और दो चुनावों में तो जीत के करीब पहंुच कर पराजय देखना और अपनी पत्नि के एक विधानसभा चुनाव की हार सहन करना यह अदम्य साहस राजनीति में हर किसी के पास नहीं होता। ऐसा उदाहरण प्रदेश में अन्य किसी नेता में शायद ही देखने को मिले। महेश पटेल गिर कर खड़े होने वाली शख्सियत है ऐसा पूरे जिले की राजनीति के जानकार लोग कहते है। राजनीति के जानकार वरिष्ठ पत्रकार व जिला पत्रकार संघ अध्यक्ष रघु कोठारी का कहना है कि कांग्रेस संगठन ने महेश पटेल को कांग्रेस से निष्कासित कर स्वयं अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारी हैं। कांग्रेस ने जो भी निर्णय लिया है वह एक अलग बात है लेकिन पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष महेश पटेल को छह साल के लिए निष्कासित करना भी कांग्रेस को इस जिले में महंगा पड़ सकता है जहां एक ओर भूरिया समझ रहे है कि महेश पटेल के राजनीतिक जीवन को समाप्त कर दूंगा वहीं दूसरी ओर भूरिया को भी लोकसभा चुनाव एवं जोबट विधानसभा चुनाव में निजी रुप से भारी नुकसान हो सकता है और इसका खामियाजा कांग्रेस पार्टी को भी भुगतना पड़ेगा और कांग्रेस का मजबूत गढ़ हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा। 

कांग्रेस की राजनीति का भगवान ही मालिक 

राजनीति में गुटबाजी, आपसी खींचतान व आरोप प्रत्यारोप होना सामान्य बात है खासकर कांग्रेस पार्टी के संदर्भ में तो यह कोई नई बात नहीं है। हाल ही के पांच राज्यों के चुनाव परिणामों में भी पंजाब जैसे राज्य में कांग्रेस की करारी हार में गुटबाजी व नेतृत्व की कमजोरी का असर दिखाई दिया है ऐसी स्थिती में कांग्रेस के निष्ठावान व कांग्रेस की जड़ों को मजबूती से टिकाए रखने वाले नेताओं को कांग्रेस प्रदेश संगठन निष्कासित करता है तो जिले में कांग्रेस की राजनीति का अब भगवान ही मालिक है। जोबट विधानसभा उपचुनाव मात्र 6 हजार मतों  से हारने के बाद महेश पटेल को कांग्रेस जिलाध्यक्ष पद से हटाया गया और आज कांग्रेस से ही निष्कासित कर दिया गया। 


  जिले में कांग्रेस के सामने चुनौती देने वाले भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष नागरसिंह चौहान 

पिछले 5 माह से जिले में कांग्रेस जिलाध्यक्ष का पद ही रिक्त चल रहा हैं। ऐसी स्थिती में आने वाले दिनों में पंचायत चुनाव, स्थानीय निकायों के चुनावों में पार्टी का खैवनहार कौन होगा यह भी कांग्रेस प्रदेश संगठन व नेतृत्व को सोचना पड़ेगा अन्यथा जिले में अभी जिस ढंग से भाजपा जिस ताकत व सक्रियता से अपना काम कर रही है तो उसे  कांग्रेस के सक्षम नेतृत्व हीन संगठन से राजनीतिक चुनौती कैसे मिलेगी? भाजपा संगठन ने अलीराजपुर के पूर्व विधायक नागरसिंह चौहान जैसे आंेजस्वी उर्जावान युवा को प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे पद पर सुशोभित कर दिया है एक ओर भाजपा के संगठन व राजनीति में अलीराजपुर जैसे आदिवासी बहुल जिले से प्रदेश उपाध्यक्ष  जैसा बड़ा पद दिया गया है वहीं कांग्रेस नेतृत्व अपने जमीनी पकड़ वाले नेताओं को निष्कासित कर अपनी ही जड़े कमजोर करने में लगा हुआ है। ।




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