जोबट विधानसभा उपचुनाव.... कल जोबट आएगें सीएम, क्या जनता की दुखती रग पकड़ पाएंगे.....?

 ##लगातार उपेक्षा और अनदेखी से पीड़ित है क्षेत्र की जनता#

#आश्वासन अब नही, त्वरित और ठोस निर्णय और उस पर अमल चाहते है क्षेत्र वासी

## जोबट उपचुनाव में होगी भाजपा की जमीनी मेहनत और कांग्रेस के लिए खादपानी भरी उपजाऊ जमीन के बीच टक्कर

कट्ठीवाडा से प्रेम गुप्ता की रिपोर्ट____।

बुधवार को जोबट विधानसभा के रिंगोल में सीएम शिवराज , एक जनसभा को सम्बोधित करेंगे जिसकी प्रशासनिक स्तर पर वृहद तैयारियां अंतिम चरणों मे है।मुख्यमंत्री के आगमन से क्षेत्र की जनता जो लंबे समय से अपने आप को छली हुई मान रही है अब उनसे अपने क्षेत्र की बदहाली को महसूस करने की उम्मीद लगाई हुई है। उसे मुख्यमंत्री से अब कोई आश्वासन नही, ठोस निर्णय और त्वरित क्रियान्वयन की उम्मीद है। मुख्यमंत्री के दौरे के बाद ही क्षेत्र में भाजपा कांग्रेस दोनों दलों  के बीच चुनावी गतिविधियां के जोर पकड़ने की संभावना है।


मुख्यमंत्री के रिंगोल दौरे को क्षेत्र में होने वाले उपचुनाव के लिए भाजपा के चुनावी अभियान का श्री गणेश भी माना जा रहा है, जिसका महत्व भाजपा के लिए सत्तारूढ़ दल होने के चलते व देश प्रदेश के तेजी से बदलते राजनीतिक समीकरणों के लिए बढ़ता जा रहा है। माना जा रहा है कि जोबट विधानसभा उपचुनाव पार्टी और शिवराज के लिए लिटमस टेस्ट साबित होंगे जिसके परिणाम दूरगामी हो सकते है।

जोबट विधायक स्व कलावती भुरिया के निधन से रिक्त जोबट विधानसभा के लिए दोनों दलों ने अभी अपने पत्ते नही खोले है किंतु लगाए जा रहे कयासों को पढ़ा, सुना, समझा जाए तो पता चलता है कि क्षेत्र की जनता अपने लिए उस उम्मीदवार पर मोहर लगाना चाहेगी जो उसे उसके अधिकार दिलवाने में सक्षम हो, क्षेत्र की समस्याओं को दबंगता के साथ उठाता रहे और उन्हें तीव्रता से हल करने का माद्दा रखता हो और जिसके साथ जनता जमीनी स्तर पर अपना जुड़ाव महसूस कर सकें।

बताते चले कि जोबट विधानसभा के चार ब्लाकों में कट्ठीवाडा सर्वाधिक पिछड़ा क्षेत्र है जिसकी प्राकृतिक घने जंगलों, पहाड़ों के चलते एक विशेष पहचान है किंतु यहां की अत्यंत निर्धन आदिवासी आबादी के विकास के लिए अब तक जमीनी स्तर के कोई कार्य नही हुए है। यहां की बदहाल सड़कों से न केवल आर्थिक वरन यहां का सामाजिक तानाबाना भी प्रभावित हुआ है जो यहां का प्रमुख मुद्दा है। क्षेत्र के जंगलों के संरक्षण और पर्यटन विकास औऱ यहां की आबोहवा में विकसित होने वाले फलों, फसलों और वनोपज के लिए विभिन्न योजनाएं बनाई जाए तो जनता की ख़ुशहाली और समृद्धि बढ़ेगी जो यहां जे आमजन की भावना है। स्वास्थ्य और शिक्षा के साधनों की कमी और रिक्तियों के चलते क्षेत्र की जनता को बड़ा खामियाजा भुगतना होता है।  इसी तरह चन्द्रशेखर आजादनगर, जोबट, उदयगढ़ क्षेत्रों में भी खस्ताहाल सड़कें यहां का प्रमुख मुद्दा तो है ही, इनकी कनेक्टिविटी समीपस्थ गुजरात के औद्योगिक क्षेत्रों से कराने, इन क्षेत्रों  के लिए घोषित सिंचाई योजना को आगे बढ़ाने से लगाकर, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकताओं में रिक्तता को दूर करना प्रमुख मुद्दे है।.....

उपचुनावों की घोषणा मात्र नही हुई है अभी, पर दोनों चिर प्रतिद्वंदी दलों और उसके कार्यकर्ताओं की हलचल तेज हो गई है और संभावित उम्मीदवार अपनी-अपनी जमावटों में भी लग चुके है। जोबट विधानसभा का परिदृश्य कांग्रेस के लिए उपजाऊ जमीन सा दिखाई दे रहा है जिसमें यदि संभावित उम्मीदवार ने सही दिशा में अभी से मेहनत कर ली तो उसे फायदा हो सकता है। किंतु,  वर्तमान में प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा की सांगठनिक एकजुटता और कार्यकर्ताओं की बूथ लेवल तक कि गतिविधियों को देखा जाए तो इस बार भाजपा का पलड़ा भारी होता दिखाई दे रहा है। विचारधारा, मजबूत काडर और कार्यकर्ताओं की विशाल फ़ौज के चलते उपचुनावों की तैयारियों में परिदृश्य सत्तारूढ़ दल के लिए लाभदायक दिखाई दे रहा है। साथ ही इनकम्बेंसी और स्थानीय समस्याओं की निरन्तर अवहेलना और उनके हल में लेतलाली विपक्षी दल के लिए संजीवनी साबित हो सकती है। स्थानीय सामाजिक संगठनों से टकराव और उन्हें साधने के लिए किसी तरह की कोशिश न होना भी सत्तारूढ़ दल के लिए सरदर्द साबित हो सकता है।

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