मच्छरों की भरमार, मलेरिया विभाग बना हुआ बीमार......

आंकड़ों पर निर्भर होने से विभाग नही कर पा रहा फोगिंग व दवा वितरण

कट्ठीवाडा से प्रेम गुप्ता की रिपोर्ट

बारिश के लगातार न होने और अधिक अंतराल से गिरने के  कारण क्षेत्र में मच्छरों की भरमार हो गई है जिससे वनांचल के ग्रामजनों के साथ ही पालतू जानवरों का रहना मुश्किल हो गया है। किन्तु मच्छरों को नियंत्रित करने के लिए बनी स्वास्थ विभाग की मलेरिया इकाई आंकड़ों के अभाव में निष्क्रिय बनी हुई है। 

ग्राम भोलवाट, ध्याना, कवछा, काछला, घुट, चिमटा से लगाकर तमाम वनांचल के क्षेत्र में बारिश के कारण हुई घास, पानी के  पोकर और धान के खेतों में भरे गड्ढों के कारण मच्छरों की संख्या ज्यादा ही गई है जो मलेरिया, डेंगू जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बन रही है। ग्रामीण घरों के नजदीक बने पोखरों, खेतों से मच्छर झुंड के झुंड आक्रमण करते है जिससे अंचल में बीमारियां पेर पसार रही है। 

आशा कार्यकर्ताओं पर निर्भर तंत्र____
इस सम्वन्ध में मलेरिया विभाग के सूत्रों ने बताया कि मच्छरों को नियंत्रित करने के लिए फोगिंग सबसे कारगर उपाय है किंतु गाइडलाइन के निर्देशों के अनुसार मलेरिया के आंकड़ों पर ही फोगिंग की जाती है और ये आंकड़े आशा कार्यकर्ता पर निर्भर है। यहां पेच यह है कि आशा कार्यकर्ता अधिकतर कम पढ़ीलिखी या पूर्णतः निरक्षर होती है जिससे ग्रामीण बुखार आने पर समीपस्थ निजी चिकित्सक के पास जाकर इलाज करा लेते है जिससे उनका रिकार्ड शासकीय चिकित्सालय में नही रह पाता। इस तरह उनके क्षेत्रों में मलेरिया विभाग फोगिंग, दवाई, किट वितरण नही करता है। 

यहां है मलेरिया, डेंगू के हाईरिस्क झोन____
मलेरिया, डेंगू जैसी मच्छर जनित बीमारियों के लिए क्षेत्र के कुछ ग्राम हाईरिस्क झोन में बने हुए है। जिला मलेरिया अधिकारी जेएस कनेश ने बताया कि ग्राम जेतपुर व ग्राम मोटी बडाई में विभाग ने फोगिंग कराई है। इसके साथ ही अनेक जगहों पर मच्छरदानी का वितरण हुआ है। पंचायतों को भी हम उनके कहने पर सहयोग करने के लिए दवाई और मशीन का सहयोग करने के लिए तैयार है। 


पशुओं के शरीर पर उभर आता है खून______
ग्राम पंचायत ध्याना के ग्राम भोलवाट के कुँवर सिंह, रमेश, काछला के महेश, रविन्द्र ने बताया कि मच्छरों के झुंड शाम होते ही पालतू पशुओं पर हमला कर देते है। ग्रामीण नीम का धुआं, अगरबत्ती, स्प्रे का छिड़काव करते है किंतु उनके सारे प्रयास विफल हो जाते है। सुबह पशुओं की चमड़ी पर खून की बूंदों को उभरा हुआ देखकर उनकी परेशानी का सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है। 

स्वास्थ्य केंद्र कट्ठीवाडा से प्राप्त जानकारी के अनुसार जुलाई, अगस्त माह की कुल ओपीडी 2395 में से बुखार के 260 मरीज पाए गए जो कि मलेरिया नेगेटिव थे। किंतु स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इससे कई गुना ज्यादा मरीज निजी चिकित्सालयों में उपचार करवाते है जो कि मलेरिया पॉजिटिव भी रहते है किंतु उनका डाटा सरकारी चिकित्सालय पर नही आने से ग्रामों में फोगिंग नही करवाई जाती है। 

भाजपा मंडल अध्यक्ष सुनील कनेश के अनुसार प्रशासन द्वारा बारिश के मौसम में फोगिंग करवाई जानी चाहिए जिससे ग्रामीण मच्छर जनित बीमारियों से बचेंगे और उन्हें उपचार के लिए चिकित्सालयों की और नही जाना पड़ेगा। 



 
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