विश्व आदिवासी दिवस---

धीरे-धीरे आना शुरू हुए समाजजन और फिर सैलाब सा उमड़ आया रैली में

"हमारी पहचान, हमारी संस्कृति को उकेरता है आदिवासी दिवस"---आदिवासी युवा

कट्ठीवाडा से प्रेम गुप्ता की रिपोर्ट

ये हमारा दिन है, हमारी पहचान, हमारी संस्कृति के महत्व को उकेरता है ये। रैली नही भी निकली तो घर में ही मनाएंगे आज आदिवासी दिवस...  ये विचार थे क्षेत्र के युवा के आदिवासी दिवस के प्रति, पर रैली निकली और ऐसी की ज़रे अनुमान ध्वस्त हो गए। सोमवार को राणा ग्राउंड पर हजारों की तादाद में आदिवासी समुदाय एकत्र हो हुआ और  परंपरागत मस्ती, अल्हड़ता और जोश से झूम कर नृत्य का आनंद लिया। 


कस्बे में आने वाला हर कदम राणा मैदान की और बढ़ रहा था, सुबह ग्यारह बजे से आसपास के ग्रामीणों का अपनी स्वेच्छा से आदिवासी दिवस की रैली में शामिल होने का सिलसिला प्रारम्भ हुआ जो शाम चार बजे तक चलता रहा। रैली में क्षेत्र और उसके आसपास के गुजरात तक के ग्रामीण राणा ग्राउंड पर एकत्र हुए और डीजे की धुन पर थिरकते हुए रंग बिरंगे पहनावों में आदिवासी संस्कृति के उल्लास को बिखेरते रहे। 

जोश और उमंग में निकली रैली

आदिवासी गानों पर झूमते थिरकते हुए युवक-युवतियां पूरे उत्साह और लयताल के साथ रैली में शामिल हुए। रैली राणा ग्राउंड से होते हुए मुख्य मार्ग से हॉस्पिटल, पुलिसथाना के सामने से निकलकर गांधी चौक होते हुए क्रांतिकारी बिरसा मुंडा प्रतिमा स्थल पर पहुंची। यहां पर समाजजनों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। 


गौरतलब है कि क्षेत्र में आदिवासी दिवस के आयोजन का यह छटा वर्ष है जो आदिवासी पारम्परिक त्यौहार भगोरिया और दशहरा की तरह से आदिवासी उत्सव और संस्कृति की छटाओं को बिखेरते हुए आदिवासी होने की गर्वीली भावनाओं को व्यक्त करता है। क्षेत्र में 2019 में आदिवासी क्रांतिकारी बिरसा मुंडा की प्रतिमा की स्थापना के बाद से अनेक परेशानियों के बाद भी आदिवासी दिवस को आदिवासी समाजजन हर्ष और उल्लास से मना रहे है।

Share on WhatsApp