सात दिवसीय भागवत कथा का हुआ समापन, निकली शोभायात्रा
श्याम संकीर्तन में भजन गायक मुकेश ढोली के भजनों पर खुब नाचे श्रोता
आशुतोष पंचोली
अलीराजपुर न्यूज। ब्यूरो चीफ
स्थानीय केशव नगर कालोनी मे काबरा एवं नवाल परिवार की और से आयाजित सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का समापन सोमवार को शोभायात्रा के साथ हुआ। कथा के अंतिम दिन कथा वाचक पंडित लोकेशानंद शास्त्री ने भगवान कृष्ण के १६ हजार १०८ विवाह का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि दिव्य ज्ञान से मानव अपने जीवन का कल्याण कर सकता है। ज्ञान के बिना इंसान अपने जीवन के सर्वोच्च स्थान को नहीं प्राप्त कर सकता है। इसके लिए जरूरी है कि वह धर्म का अनुशरण करे। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि व्यक्ति का आचरण भी उच्च हो। बिना इसके ज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं। कथा के छठे दिन रविवार रात्रि को श्याम संकीर्तन कार्यक्रम में भजन मुकेश ढोली इंदौर ने पलके ही पलके बिछाएंगे जिस दिन श्याम प्यारे घर आएंगे, दिनानाथ मेरी बात छानी कोनी तेरे से सहित अन्य शानदार भजन सुनाए गए। जिस पर उपस्थित श्रोताओं एवं कथा आयोजन समिति के सदस्यों ने खुब नृत्य किया। इस दौरान श्याम दरबार की झांकी सजाकर ज्योत जलाई गई। संकीर्तन का दौर रात 11.30 बजे तक चला। भजन के अंत में कथा में सहयोग करने वाले लोगों का कथावाचक शास्त्री जी और भजन गायक ढोली जी के द्वारा दुपट्टा पहना कर सम्मान किया गया
*भगवान की कथा अनंत है जो कभी समाप्त नहीं होती*
कथा के अंतिम दिन सोमवार को कथा का वाचन करते हुए कथा वाचक पंडित शास्त्री ने कहा सुखदेव जी ने राजा परीक्षित को भागवत महापुराण सात दिन के अंदर सुना कर उन्हें भगवत धाम का अधिकारी बनाया। मरने वाले व्यक्ति को क्या करना चाहिए, इस प्रश्न के उत्तर में सुखदेव जी ने राजा परीक्षित को सात दिन तक भागवत सुनाई। जब तक्षक नाग राजा परीक्षित को डसने आया, उससे पहले राजा परीक्षित भगवान के धाम में मन लगा कर बैठ ग और तक्षक का स्पर्श होने से केवल शरीर नष्ट हुआ आत्मा को कोई कष्ट नहीं। इतना दिव्य ज्ञान सूतजी महाराज ने ऋषियों को दिया। उन्होंने कहा भागवत महापुराण का सदा श्रवण करना चाहिए, बार-बार करना चाहिए यह भगवान की अनंत कथा है, जो कभी समाप्त नहीं होती है। यह निरंतर चलती रहती है।
*भगवान कृष्ण ने संसार को सच्ची मित्रता का पढ़ाया पाठ*
पंडित शास्त्री ने कहा आज मित्रता मात्र स्वार्थ पर आकर टिक गई है, लेकिन मित्रता का संबंध एक ऐसा संबंध है, जिससे बड़ा संबंध ना तो कोई है और ना ही होगा। मित्रता अपने आप में एक परिपूर्ण रिश्ता है, जैसे किसी भी वस्तु के लिए कोई भी स्थान नहीं होता है। उन्होंने भागवत में कृष्ण और सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि स्वयं भगवान कृष्ण ने इस संसार को सच्ची मित्रता का पाठ पढ़ाया है। कृष्ण के राजा होने के बाद भी वर्षों बाद सुदामा को पहचानना और उन्हें अपने समान आदर दिलवाना और प्रेम में चावल खाकर दो लोकों का राजपाठ देना सच्ची मित्रता को इंगित करता है। कथा के आयोजन को लेकर आयोजक रितेश काबरा के द्वारा सभी का सम्मान एवं नगर वासियों का आभार व्यक्त किया गया। माहेश्वरी युवा संगठन के द्वारा आयोजित परिवार गुड्डू काबरा एवं गोपाल नवाल का पुष्प माला पहनाकर सम्मान किया गया।
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