चिट्ठी ना कोई संदेश ना जाने वो कौन सा देश जहां तुम चले गए.. भजन गाकर ओम जी दासाब ने ब्रह्मलीन नाना महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की इस दौरान सभी श्रोताओं की आंखें नम हो गई
जोबट से हर्षित शर्मा की रिपोर्ट
गीता के अनुसार जीवन जीने के तीन मार्ग योग बताएं है, जिसमें श्रेष्ठ कर्म योग, ज्ञान योग और भक्ति योग। भगवान के भक्ति मार्ग अलग-अलग हो सकती है लेकिन तीनों में सर्वश्रेष्ठ मार्ग योग है तो वह भक्ति योग है और भगवान को प्रेम भाव भक्ति से प्राप्त किया जा सकता। परमात्मा प्रेम के भूखे हैं। गृहस्था अवस्था में रहकर भगवान की भक्ति कैसे की जाए यह नृसिंह मेहता से सीख मिलती है और नरसी मेहता ने भगवान श्रीकृष्ण का प्रेम भाव से प्राप्त किया था।
यह प्रेरणादायी बात प्रसिद्ध कथावाचक पंडित अनिरुद्ध मुरारी रतलाम वाले ने जोबट नगर के श्रीकृष्ण मंदिर परिसर में आयोजित ब्रह्मलीन पं. नटवरलाल शर्मा की द्वितीय स्मृति में पांच दिवसीय संगीतमय नानी बाई के मायरा में चौथे दिन कही है। नानी बाई के मायरे के पात्र नृसिंह मेहता के लिए हर जगह कांटो की रहे थी जिस प्रकार व्यक्ति को गुलाब के पौधे में कांटे नजर आते हैं फूल खुशबूदायी होता है। उसी तरह नृसिंह मेहता को भगवान श्रीकृष्ण पर विश्वास था और हर राह उनके लिए सरल थे।
नानी बाई के ससुराल वालों ने नृसिंह मेहता का बहुत अपमान किया
कथावाचक पंडित अनिरुद्ध मुरारी ने नानी बाई मायरे के प्रसंग सुनाते हुए कहा कि नानी बाई के ससुराल वालों ने नृसिंह मेहता का बहुत अपमान किया बासी भोजन परोसा उसके बाद भी वे हर अपमान को सहन किया। क्योंकि उनमें संस्कार थे। परमात्मा प्रेम से प्रसन्न हो जाता हैं नृसिंह महाराज में भगवान के प्रति प्रेम था। जैसी प्रकृति वैसे परमात्मा होते हैं एक दाने के हजार दाने देते।
कथा के चौथे दिन कथा परिसर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े और कथा में संतों का समागम भी हुआ है इस अवसर पर गंगाकुई के संत श्री सुरजपूरी जी , शिवगढ़ के संत श्री ने पोथी पर पूजन अर्चन किया संतों का आयोजक परिवार के रघुनंदन शर्मा पंडित हरिओम शर्मा ने पुष्पमाला से स्वागत अभिनंदन किया।
श्री कृष्ण सुदामा की जीवंत झांकी कि खूब सराहना की गई
संगीतमय नानी बाई मायरा कथा के दौरान सुदामा श्रीकृष्ण की लीला का वर्णन हुआ है जिसमें जीवंत झांकी प्रस्तुत हुई है। श्रीकृष्ण के रूप मे सजे वासुदेव वाणी और सुदामा के रुप मे सजे जयंतीलाल राठौड़ आकर्षण के केंद्र रहे। साथ ही प्रसिद्ध राम कथा वाचक ओम जी दासाब नें चिट्ठी ना कोई संदेश ना जाने वह कौन सा देश जहां तुम चले गए... भजन सुना कर ब्रह्मलीन नाना महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की पूज्य दासाब के द्वारा जब यह भजन गाया जा रहा था उस समय पंडाल में उपस्थित श्रोताओं की आंखे नम हो गई थी।
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