आम्बुआ में आदिवासी समाज का प्रसिद्ध भीलवट मेला आज 29 नवम्बर को

आम्बुआ से गोविंदा माहेश्वरी की रिपोर्ट 

29 नवम्बर को काली चौदस की रात में आम्बुआ के पटेल फलिया में आदिवासी समाज का प्रसिद्ध धार्मिक भीलवट मेला आयोजित होगा ,मेले में आम्बुआ बोरझाड़ सहित आसपास के अनेक गावो से हजारों की संख्या में भीड़ शामिल होगी ,उल्लेखनिय है की विगत कई वर्षों से आम्बुआ अलीराजपुर  मार्ग के बीच आम्बुआ से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पटेल फलिया में वर्षो पुराने वट वृक्ष के नीचे छोटी दिवाली के बाद आदिवासी समाज का रात्रिकालीन प्रसिद्ध धार्मिक भीलवट मेला आयोजित होता आ रहा है ,आदिवासी समाज के लोग यहाँ स्थित अपने आराध्य देव बाबा भीलवट की पारंपरिक रीती रिवाज से पूजा अर्चना करते आ रहे है ,ग्रामीण अंचल से मन्न्तधारी आदिवासी समाज के परिवारों की अनेक टोलिया मेले में शामिल होती है और धार्मिक रीती रिवाज से अपने आराध्य देव की पूजा अर्चना करते है|


 बाबा देव को पूजा अर्चना के साथ नारियल ताड़ी दारू की धार,मिट्टी के घोड़े ,मिट्टी के ढाबे चढ़ाए जाते है तथा अनेक बकरे व मुर्गे की बलि दी जाती है ,पूजा पाठ की सम्पूर्ण रस्म यहाँ के पुजारा के द्वारा निभाई जाती है ,पूजा अर्चना के साथ अनेक मन्न्तधारी देर रात दहकते अंगारो पर नंगे पैर चलकर बाबा देव के सामने मन्न्त उतारते है इसे चूल चलना कहा जाता है मेले के मुख्य आकर्षण का केंद्र यह होता है , इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में अनेक गांवो से भिड़ जुटती है पटेल फलिया के निवासी श्री विक्रम रावत (सर) ने इस संबंध में बताया की भीलवट मेला पशुधन ,कृषि वृद्धि ,पारिवारिक सुख शांति, तथा बीमारी से बचाव के साथ अपनी मनोकामना पूर्ण होने के उद्देश्य से आयोजित होता है,भीलवट मेला आयोजन समिति के प्रमुख तकसिंग रावत ,करण रावत ,भेरूसिंग रावत ,रमेश रावत ने मेला कार्यक्रम को शांतिपूर्वक सफल बनाने हेतु व शाशन के नियमो का पालन करने हेतु सभी से मेले में मास्क लगाकर आने हेतु कहा गया है ।


ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती वर्षा जुवानसिंग रावत ने बताया की पंचायत की ओर से सम्पूर्ण लाइट व , पेयजल व कंट्रोल रूम की व्यवस्था रहेगी ।

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