267 रूपए का युरिया खाद 340 रूपए में खुलेआम बेचा जा रहा है
जवाबदेह अधिकारी चुपचाप बैठे
जिला प्रशासन की नाक के नीचे किसानों के साथ हो रही खुली लुट
आशुतोष पंचोली / रघु कोठारी
आलीराजपुर न्यूज।
आदिवासी अंचल आलीराजपुर जिले में जिला मुख्यालय पर युरिया खाद को लेकर किसानो के साथ खुलेआम लूटपाट हो रही है। 267 रूपए का युरिया खाद व्यापारियों द्वारा धडल्ले से 340 रूपए में बेचा जा रहा है, जिला प्रशासन की नाक के नीचे खुलेआम किसानों के साथ चल रही इस लूट पाट की जानकारी जवाबदेह कृषि अधिकारियों को भी है परंतु लिफाफा पद्धति से चल रही इस लूट में अधिकारी वर्ग कार्रवाई करने के बजाय अपना मोबाइल बंद कर के ग्रामीण क्षेत्रों का झूठा दौरा बताकर आए दिन जिला मुख्यालय से गायब रहते है। ज्ञात रहे कि कंपनी द्वारा जो खाद 267 रूपए के मुल्य में थोक डिलरो को दिया जा रहा है उसमें थोक डिलर एवं फुटकर व्यापारी का कमीशन दर्ज है। किंतु यहां पर कृतिम अभाव पैदा कर के युरिया खाद की हो रही काला बाजारी में ३४० रूपए लेकर किसानों को युरिया खाद बेचा जा रहा है। व्यापारियों ने लायसेंस में दर्ज गोदामो के अलावा अवैध रूप से अघोषित गोदामो में भी युरिया खाद का संग्रहण कर रखा है। जिसकी जानकारी जवाबदेह अधिकारियों को भी है परंतु कार्रवाई की आड़ में लिपा पोती का खेल चल रहा है। जिसके चलते इस भ्रष्ट व्यवस्था के बीच लुटपाट का केंद्र मात्र गरीब किसान बना हुआ है। जिले में एक-एक व्यापारी के घर पर एक ही परिवार के सदस्यों के नाम से 4 से 5 लायसेंस बने हुए है इन लायसेंसो की आड़ में खाद की कालाबाजारी जमकर की जा रही है। कुछ दिन पहले शिकायत मिलने पर दिखावे के रूप में कृषि अधिकारियों ने छोटे फुटकर व्यापारियों के यहां छापा कार्रवाई करते हुए चालानी कार्रवाई कर उनके लायसेंस निरस्त कर दिए और थोक व्यापारियों को बचाकर कार्रवाई की खाना पूर्ति कर दी गई। जबकि अधिकारियों को उचित रूप से जो कार्रवाई थोक व्यापारियों के खिलाफ करना चाहिए वह नहीं करते हुए जिला कलेक्टर को भ्रामक जानकारी देकर भ्रमित किया जा रहा है।
एक ही परिवार में कई लोगों के नाम से लायसेंस
कृषि उप संचालक केसी वास्केल से जब इस संबंध में जानकारी चाही गई तो काफी देर तक टाल मटोल करने के बाद नगर सहित जिले में खाद बेचने वाले व्यापारियों की सूची देखकर यह हेरानी हुई कि व्यापारियों द्वारा अपने परिवार के कई सदस्यों के नाम पर लायसेंस लिए गए है। हालात तो यह हो गई कि पिता पुत्र, पति पत्नी सहित अन्य लोगों के नाम पर थोक एवं फुटकर के लायसेंस लेकर खाद का खेल बड़ी मात्रा में कई वर्षो से किया जा रहा है। मीडिया को प्राप्त जानकारी के अनुसार अलग अलग लायसेंस बनाने की प्रकिृया खाद व्यापारियों द्वारा सोच समझकर रणनीति के तहत की गई है ताकि अलग-अलग गोदामो में खाद रखकर उसकी जमकर कालाबाजारी की जा सके।
समाचार छपते ही मचा हड़कंप, व्यापारियों ने की गुप्त बैठक
जब इस प्रतिनिधि द्वारा विगत दिवस कृषि विभाग में पहुंचकर उप संचालक कृषि वास्केल से नगर सहित क्षेत्र में व्यापारियों द्वारा खाद की की जा रही कालाबाजारी का मुददा उठाया तो उनके द्वारा काफी समय तक जो जानकारी इस प्रतिनिधि को चाहिए थी वह उपलब्ध ही नहीं करवाई गई। जिस पर हमारे द्वारा वास्केल को बताया गया कि आपके द्वारा दी गई सूची के अतिरिक्त व्यापारियों के अनेक गोदाम शहर सहित आसपास के क्षेत्रों में मौजूद है जहां बड़ी संख्या में खाद भरकर रखी हुई है। वास्केल द्वारा देर शाम तक गोदाम की सूची नहीं दी गई वहीं जब इस बात की जानकारी खाद व्यापारियों को लगी तो उनमें हड़कंप मच गया और बड़े खाद व्यापारियों द्वारा फुटकर व्यापारियों को साथ लेकर एक गुप्त बैठक भी की गई।
वहीं इस बात की जानकारी भी इस प्रतिनिधि को लगी है कि चांदपुर में बोहरा समाज के एक व्यापारी और राठौड़ समाज के व्यापारी ने सोसायटीयों से शासकीय मुल्य से दिए जाने वाला खाद अधिकारियों से साठ गाठ कर खरीद लिया और इसे करीब 350 से 400 रूपए तक के दाम में बेचा है। यह खाद किसानों को 2६७ रूपए के दाम से किसानों को बेचा जाना था।
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