उदयगढ़ से राजेश जयंत की रिपोर्ट।
भारतीय डाक विभाग की स्पीड पोस्ट सेवा विभाग के ही कुछ लोगों के कारण स्पीड को बदनाम कर रही है। 12 जून को इंदौर स्पीड पोस्ट भेजी गई दवाइयों की उदयगढ़ में डिलीवरी 3 दिन में हो जाना चाहिए थी लेकिन 8 दिनों में भी भारतीय डाक विभाग की स्पीड 180 किलोमीटर की दूरी तय नहीं कर पाई है ।उदयगढ़ के कमलेश का इंदौर में मनोचिकित्सक पवन राठी के वहां ट्रीटमेंट चल रहा है। वैश्विक महामारी कोविड-19 से जूझ रहे इंदौर मे 2 माह से जाना नहीं हो पाया तब डॉक्टर पवन राठी ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से काउंसलिंग कर स्पीड पोस्ट माध्यम से दवाइयां भिजवाई।
12 जून को इंदौर से निकली स्पीड पोस्ट 3 दिन में डिलीवरी हो जानी चाहिए थी बीच में रविवार आ गया तो चौथे दिन मिलना ही थी।मोबाइल से *E075491762IN* स्पीड पोस्ट इवेंट सर्च करने पर पता चल रहा है कि 15 जून को उक्त डाक जोबट डाकघर में आ चुकी है।पहले उदयगढ़ की डाक सीधे उदयगढ़ ही आती थी लेकिन कोरोना के चलते परिवर्तित की गई व्यवस्था में डाक जोबट तक ही आती है । उदयगढ़ से डाकिए प्रताप सिंह अजनार को वहां जाकर डाक लाना पड़ती है ।
प्रतापसिंह का कहना है कि वह प्रतिदिन जोबट जा रहा है लेकिन डाकघर के प्रभारी शेख साहब उसे स्पीड पोस्ट वाली डाक नहीं दे रहे हैं। नहीं देने का कारण उसने बताया कि नेट बंद होने से स्पीड पोस्ट की एंट्री नहीं हुई है। इसी संदर्भ में जोबट डाकघर के प्रभारी शेख साहब से संपर्क किया तो उन्होंने बताया डाकिया प्रताप अजनार 3 दिन से डाक लेने के लिए जोबट नहीं आया है।
इस मामले में डाक विभाग के एडिशनल पोस्ट मास्टर यशवंत शर्मा से बात की तो उन्होंने आश्चर्य जताया और जोबट के शेख साहब से बात की। उन्होंने भी यही बताया कि डाक जोबट आ चुकी है लेकिन यहां से उदयगढ़ नहीं पहुंची।
"मामला मेरे संज्ञान में आया है। यह बड़ी विसंगति है। पता लगवा रहा हूं। जिम्मेदारों पर उचित कार्रवाई की जाएगी" - अखिल राठौर ,एसडीएम जोबट
