देशी और उन्नत किस्म के आमों के तीस फीसदी ही आने की उम्मीद,
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आम की कमजोर फसल से आदिवासी अंचल में महंगे होंगे आम
कट् ठीवाड़ा से प्रेम गुप्ता की रिपोर्ट
मौसम की बेरुखी के कारण क्षेत्र की प्रसिद्ध आम की किस्म नूरजहां, जो अपने विशिष्ट आकार को लेकर राष्ट्रीय स्तर तक प्रसिद्ध है का उत्पादन कम हुआ है। साथ ही इस अंचल में होने वाली आमों की अन्य देशी व उन्नत किस्मों के उत्पादन भी सामान्य से मात्र बीस से तीस फीसदी ही उतरने की सम्भावना है जिससे अंचल में आम के भावों में बहुत तेजी रहेगी।
गौरतलब है कि बुंदेलखंड में पाई जाने वाली हाथी झूल नामक आम की प्रजाति से उन्नत किए नूरजहां का आकार अधिकतम तीन से चार किलो तक होता है जिसका उपयोग अचार के लिए किया जाता है। विशिष्ट आकर के चलते आम की इस प्रजाति की मांग बहुत ज्यादा है, किन्तु कट् ठीवाड़ा क्षेत्र में इस प्रजाति के कुल आठ पेड़ ही है जिन पर लगे आमों को अक्सर पेड़ों पर ही बुक कर लिया जाता है। नूरजहां के पेड़ को विशिष्ट संरक्षण, आबोहवा और देखरेख की आवश्यकता होती है,जिसके चलते इसे अनेक जगह लेजाकर लगाने की कोशिशें की गई किंतु कट्ठीवाड़ा के बाहर इसका पेड़ कहीं भी पनप नही पाया। इस वर्ष केवल मात्र तीन पेड़ों पर ही नूरजहां लगे हुए है।
अंचल में आम के अनेक फॉर्म हुए तैयार, पर उत्पादन कम
क्षेत्र के साजनपुर, काचला, करेली मवड़ी, रथोडी, क़ाबरीसेल, दरखड, अंधरकांच, चांदपुर, झरकली, फूलमाल, भूरिआम्बा जैसी जगहों में आम के अनेक फार्म तैयार हो चुके है किंतु उनमें आम बहुत कम आए है। अंचल में देशी आम भी बहुत कम है। ग्रामीणों के अनुसार पानी की अधिकता, एकान्तर फलन प्रक्रिया के चलते देशी आम भी बहुत कम आए है जिससे आमों का भाव अंचल में अधिकतम होगा।श्रीदेवी,पंखिड़ा, मलगुब्बा जैसी कई किस्में है क्षेत्र में कट्ठीवाड़ा क्षेत्र की विशिष्ट आबोहवा के चलते यहां आम की अनेक किस्में ग्रामीण अंचल में होती है जिसे बेचकर ग्रामीणों को बहुत फायदा होता है। कच्चे गिरे हुए आमों से छाले(अमचूर) बनाकर भी बेचे जाते है। अंचल में पारंपरिक आम जैसे लंगडा, केसर, हापुस, तो अनेक जगहों पर होता ही है कुछ विशिष्ट किस्मे स्थानीय राजपरिवार के सदस्य भरतराज सिंह, शिवराज सिंह द्वारा उनके बगीचों में तैयार की गई है जो विशिष्ट स्वाद लिए हुए है। नूरजहां को 1999 में नेशनल अवार्ड व 2010 में किंग ऑफ मेंगो अवार्ड से नवाजा जा चुका है। कट् ठीवाड़ा का प्रसिद्ध नूरजहां आम, जो आम की दुर्लभ प्रजाति के तौर पर विख्यात है|
कट् ठीवाड़ा के उद्यानिकी विभाग के ग्रामीण उद्यानिकी विस्तार अधिकारी नितिन पाटीदार ने बताया कि शासन द्वारा कृषकों को आय बढ़ाने के किए आम के पौधे लगाने की सलाह व सहायता दी जा रही है। इसके अंर्तगत पौधों का वितरण और मनरेगा से आर्थिक सहयोग किया जाता है।


