मध्यप्रदेश के प्रथम गायत्री शक्तिपीठ की स्थापना 1980 में की
जोबट हर्षित शर्मा
अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रणेता परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य के द्वारा मध्यप्रदेश के प्रथम गायत्री शक्तिपीठ की स्थापना 1980 में की । नौ देवियों की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करवाते हुए आचार्य जी ने कहा था कि सदुर क्षेत्र में स्थापित यह शक्तिपीठ जनजागृति का केंद्र बनकर मानवता की सेवा के लिए रचनात्मक गतिविधियों का केंद्र बनेगा । इस कार्यक्रम में कई प्रांतों के हजारों कार्यकर्ता इस अभूतपूर्व आयोजन में सम्मिलित हुए थे ।
तभी से यह शक्तिपीठ इस क्षेत्र में नि: शुल्क चिकित्सालय , महिला सिलाई प्रशिक्षण केन्द्र , युवा नेतृत्व प्रशिक्षण , वाचनालय , पुस्तकालय , कुष्ठ रोग उन्मूलन अभियान जैसी गतिविधियों को संचालित करने के उपरांत आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ साथ भारतीय संस्कृति के अनुरूप हिंदी अंग्रेजी माध्यम के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के साथ ही योग प्रशिक्षण , बाल संस्कार शाला और नेत्रदान का संकलन केन्द्र का संचालन कर धार्मिक आस्था के साथ ही समाज सेवा का जागृत केंद्र बन गया है ।
इस केंद्र से का स्थापना दिवस के मोकै पर प्रतिवर्ष परिवारों में गायत्री महायज्ञ का आयोजन घर घर किया जाकर मनाया जाता है जिसमें क्षेत्रीय यज्ञाचार्यो के अतिरिक्त बाहर से भी यज्ञाचार्यो की व्यवस्था की जाती रही है । किंतु वर्तमान में कोरोनावायरस संक्रमण के कारण लाकडाउन का पालन करने के संकल्प के साथ यह आयोजन साधकों के द्वारा सरल सर्वोपयोगी संक्षिप्त हवनविधी के साथ अपने अपने घर में अपने परिवार के साथ यज्ञ संपन्न कर स्थापना दिवस मनाया । शक्तिपीठ में परिव्राजक रामसिंह चौहान श्रीमती सेना चौहान के द्वारा असंख्य दीपकों की रोशनी की गई । गायत्री परिवार के सक्रिय कार्यकर्ताओ के द्वारा पूर्व में ही 111 घरों में यज्ञकुण्ड की स्थापना कर दी जाने से लोगों में उत्साह के परिणामस्वरूप इस बार जोबट में तो 314 परिवारों के द्वारा यज्ञ का आयोजन हुआ ही । साथ ही साथ तहसील के ग्राम बोरी में 43 परिवारों और खट्टाली में 10 परिवारों में किये गये इस यज्ञ में गायत्री मंत्र के साथ सबको स्वस्थ रखने और सबके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए महामृत्युंजय मंत्र की आहुतियां , कोरोनावायरस से उत्पन्न रोग महामारी के निवारण के लिए कृमि नाशक मंत्र , रोगनिवारण मंत्र , आपदा रक्षार्थम मंत्र की आहुतियां कुल 367 परिवारों के द्वारा समर्पित की गई ।
