गुजरात से 300 किमी पहाड़-जंगल पैदल चलकर मप्र के आमखुट तक पहुंचे 19 ग्रामीण, खण्डवा क्षेत्र के निवासी है।

अंकलेश्वर से निकले हो गए 8 दिन,  प्रशासन ने किए भोजन और रहने के साथ खण्डवा जिले की और भेजने के इंतजाम
कट्ठीवाड़ा। प्रेम गुप्ता
लॉक डाउन 2.0 की घोषणा के बाद गुजरात मे ही ठहरे हुए मप्र से गए हुए  ग्रामीण मजदूरों का धैर्य टूट रहा है, वे वहां से किसी भी हालत में अपने घरों की और जान चाह रहे है उसके लिए उन्हें चाहे वाहन मिले या नही, रास्ते मे खाना मीले या नही...बस उन्हें तो अपने मुल्क, अपने वतन, अपनी जमीन पर जाने की बेताबी छा गई है।
अपने घर जाने की इसी बेसब्री ने अंकलेश्वर( गुजरात) में रह कर  विभिन्न प्रकार के रोजगार करने वाले 18 ग्रामीण युवा जो कि खंडवा जिले के खालवा क्षेत्र एवम 1 ग्रामीण भोपाल का रहने वाला था,  ने अपने कदम अपने वतन की ओर बढ़ा लिए।  मार्ग में इन गग्रामीणों को लॉक डाउन  के चलते अनेक दुश्वारियों का सामना करना पड़ा।
 

अंकलेश्वर से देवगढ़ बारिया होते हुए यह ग्रामीण युवक रतन माल की की पहाड़ियों से होते हुए मध्य प्रदेश के करेलीमवड़ी, काबरीसेल  होते हुए आमखुट तक पहुंच गए।स्थानीय ग्रामीणों ने बाहर से आए ग्रामीणों की सूचना पुलिस चौकी पर दी तो स्थानीय प्रशासन हरकत में आ गया।

थाना प्रभारी कट्ठीवाड़ा ईश्वर ईश्वर चौहान, बीएमओ डॉक्टर नरेंद्र सिंह भयडिया अपनी-अपनी टीम  लेकर आमखुट पहुंच गए, वहां पर इन ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया एवम उनकी भोजन और आराम करने की व्यवस्थाएं की गई।  सूचना मिलने पर तहसीलदार संतुष्टि पाल ने स्थानीय छात्रावास भवन की व्यवस्था भी इस ग्रामीण दल के लिए की और अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इससे अवगत करवाया। जनपद सीईओ लक्ष्मण सिंह चौहान भी अपने चौहान भी अपने दल के साथ वहां पर आ गए  समाजसेवी पारसी बारिया बारिया स्थानीय सरपंच मनोज मण्डलोई ने खुद भोजन की तैयारी की। 
                                
स्थानीय प्रशासन की सूचना पर जिला प्रशासन हरकत में आया और वहां से कलेक्टर खंडवा से संपर्क किया गया। वहां से चर्चा होने पर ग्रामीण मजदूरों के लिए आरटीओ राजेश गुप्ता द्वारा एक वाहन भी कर दी गई। आवश्यक प्रक्रियाओं के पश्चात इन ग्रामीणों को गृह क्षेत्र में सुरक्षित तरीके से पहुंचा दिया जाएगा।  
प्रशासकीय दल को लगभग 300 किलोमीटर की दूरी तय कर आए आए ग्रामीण मजदूरों ने बताया बताया की उन्होंने यह रास्ता पूरी तरह से जंगल क्षेत्र होकर तय किया है।  इस दौरान उन्हें अनेक परेशानियां जरूर हुई,  किंतु वह अपने घर जाने की चाह में उन परेशानियों के होते हुए भी निरंतर चलते रहे। उन ग्रामीणों ने कहा कि उनके खाने के लिए भोजन, घर जाने के लिए वाहन की व्यवस्था में जो सहयोग प्रशासन द्वारा किया गया है, उससे उन्हें अपनेपन का आभास हो रहा है। 
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