मप्र के ग्रामीणों को..मजदूरो की वापसी से लॉकडाउन की धज्जियां उड़ाई
हजारों की तादाद में आने वाले ग्रामीणों की स्क्रिनिग के लिए दिन-रात एक कर रहा मप्र का प्रशासन, ग्रामीण अंचल में मची भगदड़ से महामारी का गंभीर खतरा
मोदी जी, यह आदिवासियों के प्रति आपका सौतेला व्यवहार है--कलावती भूरिया, विधायक जोबट विधानसभा
कट्ठीवाड़ा से आलीराजपुर न्यूज़ के लिए प्रेम गुप्ता की रिपोर्ट
24 मार्च की रात्रि 8 बजे मोदीजी आपने कोरोना से बचाव के लिए लॉक डाउन की घोषणा की। आपने बताया कोरोना मतलब कोई..रोड़ पर.. ना जाए ! पर यह क्या ? इधर आपने लॉक डाउन घोषित किया और उधर आपकी ही भाजपा सरकार ने मप्र से रोजगार के लिए गए हुए गरीब आदिवासी मजदूरों को रोड़ पर उतरने को मजबूर कर दिया। गुजरात सरकार का पूरा महकमा हमारे मप्र के इन गरीबों को वापिस उनके घरों की और भेजने में जुट गए। यहां तक कि राज्य शासन खुद बड़ी-छोटी गाड़ियों में ईंधन भरवाकर गुजरात की सीमा पर के कस्बों में छोड़कर जा रहा है, जहां से वे मजबूर, गरीब कोई साधन न मिलने से पैदल ही मप्र की और आ रहे है। ना तो उनकी कोई जांच वहां हो रही है और ना ही उन पर किसी का ध्यान है। उनके पैदल ही मप्र की और आने से उनमें और अन्य स्थानीय लोगों में भी बड़ी संख्या में संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा उत्तपन्न होने की पूरी संभावना है। वहीं जोबट विधायक कलावती भूरिया ने गुजरात प्रशासन और मोदी जी को आदिवासियों के प्रति इस सौतेले व्यवहार के लिए चेतावनी दी है।
*मप्र का प्रशासनिक अमला खतरा मोल लेकर भी कर्तव्य में जुटा*
गुजरात गए हुए आलीराजपुर क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों के अचानक वापस आने से गुजरात की सीमाओं पर लगे चेक पोस्ट पर तैनात प्रशासनिक अमला कोरोना वाईरस का खतरा मंडराने के बावजूद भी दिन रात चेक पोस्ट पर डटा हुआ है। आधी रात से लेकर सुबह तक वहां आने वाले ग्रामीणों की स्क्रिनिग अल्प साधनों के साथ करना अमले के लिए बड़ी चुनौती है।
*चेक पोस्ट के अलावा लूप होल्स से हजारों ग्रामीण अंचल में आए*
सूत्र बताते है कि गुजरात से जिले की चाँदपुर चेकपोस्ट, बड़ाखेड़ा चेकिंग बेरियर, काछला चेकिंग बेरियर, अंधारकांच चेकिंग बेरियर से लगभग चार हजार से अधिक ग्रामिणों ने घर वापसी की है। और इनसे कहीं बड़ी तादाद में लूप होल्स से आकर ग्रामीण कुक्षी, धार, झाबुआ जैसी जगहों पर भी गए है।
बाहरी क्षेत्रों से इतनी बड़ी तादाद में ग्रामीणों का आना, और उनकी स्क्रीनिंग करना संभव नही है। जिससे प्रशासन ने स्थानीय आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकताओं, सचिवों को जिम्मेदारी दी है। किंतु बाहर से आए इतने लोगों को क्वारेंन्टीन करना प्रशासन के लिए बहुत चुनोती भरा है।
*मोदीजी...गुजरात के स्वास्थ्य अमले की संवेदनाऐं भी शून्य हो गई क्या ...?*
चाँदपुर पर मप्र के प्रशासनिक अमले में पदस्थ सूत्रों के अनुसार गुजरात सरकार की मानवीयता, संवेदनशीलता भी उन आदिवासी ग्रामीणों के लिए खत्म हो गई दिखती है, जो उनके खेतों, कारखानों, के लिए अपना पसीना, अपना स्वास्थ्य, अपनी जान तक कुर्बान कर देते है। हाल ही में चाँदपुर चेक पोस्ट पर गुजरात की और से एक्सीडेंट में घायल आदिवासी युवक को लाने वाली गाड़ी को जांच के लिए रोका गया, रोकने के दो मिनट बाद ही उसकी मृत्यु हो गई। पता चला उसे एक्सीडेंट होने पर बड़ौदा के धीरज हॉस्पिटल ले जाया गया था, जहां से उसे इलाज करने से मना कर वापस मप्र भेज दिया गया। वापसी में चांदपुर चेकपोस्ट पर उसने अंतिम सांस ली। इसी तरह गुजरात के हॉस्पिटलों से वहां भर्ती ग्रामीणों को एक साथ डिस्चार्ज कर दिया जा रहा है। क्या एक साथ सारे ग्रामीण ठीक हो रहे है ?
*सीमित संसाधन, सीमित अमले के कारण जनसहयोग पर टिकी है उम्मीदें*
सतत चलते फोन कॉल्स, सतत मीटिंग्स, और बड़े क्षेत्र को सम्हालने की चुनौतियों के बीच खुद को सुरक्षित रखने की जवाबदेही यह इस विकट घड़ी में जनता को बचाने में जुटे प्रशासनिक अमले की तस्वीर है। निरंतर अपने घरों से आती चिंतित कुशलक्षेमों को "बढ़िया हूँ"के आश्वासनों से आश्वस्त करने का अभिनय भी करना होता है। स्थानीय जनता, इन कोरोना योद्धाओं को बस इतना सहयोग भी दे दे कि सारे दिशा निर्देशों पर ईमानदारी से अमल करें, अन्य नागरिकों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक करें तो इनकी राह और जनता की जिंदगियां बनी रहेगी।
मजदूरों को कच्छभुज में पानी तक नही दिया जा रहा है, उनकी मजदूरी के रुपए भी रोक दिए गए है। मोदी जी, विदेशों से हवाईजहाज में भरकर करोड़पतियों को ले रहे है और हवाई अड्डों पर उनके लिए पांच सितारा व्यवस्था कर रहे है किंतु गुजरात को अपने पसीने से चमकाने वाले आदिवासी मजदूरों को उनके हाल पर छोड़कर घर भेजा जा रहा है। यह उनका सौतेला व्यवहार है।
--कलावती भूरिया


