जीवन में लंबाई का नहीं गहराई का महत्व होता हैए जिन्होंने भी पाया है 24 घंटे में ही पाया है. राष्ट्रसंत मुनि पुलकसागर

जैन श्रीसंघ में सामेला कर मुनिश्री की अगवानी की
आशुतोष पंचोली
आलीराजपुर।ब्यूरो चीफ
शास्त्रों में लिखा है यदि संत आता है तो उसका स्वागत करो। संत ठहरता है तो उसकी व्यवस्था करो। संत जाता है तो जाने दो उन्हे रोको मत। क्योंकि जाते हुउ संत को कभी रोकना नहीं नदी रुक जाएगी तो पानी सड जाएगा यदि संत रुक जाएगा तो हजारों का भाग्य सो जाएगा। संत चलता है तो हजारों का भाग्य जागता है। ये बात स्थानीय राजेंद्र उपाश्रय में भारत गौरव राष्ट्र संत मुनि पुलक सागरजी ने प्रवचन के दौरान श्रावकों से कही। उन्होने कहा कि तुम्हारे जैसे भाईयों का कल्याण करने के लिए ही आगे जाता है।
उन्होने कहा कि आलीराजपुर में बहुत कुछ है। आलीराजपुर नाम सुनकर लगा कि यहां से निकलना ही मुश्किल होगा। मै कहुंगा कि छोटा सा जीवन मिला है। जीवन बहुत लंबबा नहीं होता है। जीवन को ज्यादा लंबा लंबा मत बनाओं। इससे कोई फर्क नहीं पडने वाला। जिन्होने भी पाया है 24 घंटों में ही पाया है। ऋषभदेवए महावीर स्वामीए राम और कृष्ण के समय भी दिन और रात 24 घंटे के ही होते थे। उन्हे भी 24 घंटे मिले। याद रखना जो कुछ भी मिलेगा 24 घंटे में मिलेगा। जीवन में लबाई का कोई महत्व नहीं होता है जीवन में गहराई का महत्व होता है। किसी की एक वर्ष की जिंदगी 100 वर्ष का काम कर सकती है।
मरने बाद ऐसे प्राप्त होता है स्वर्ग
ध्यान रखिए मंदिरों में जाकर स्वर्ग नरक के नक्शें मत बनाइए। किताबों में स्वर्ग नर्क की बाते मत पढिएए जिंदगी दीवारों या नक्शे पर नहीं हुआ करती। स्वर्ग नरक हमारे जीवन में हुआ करता है। मरने के बाद ईश्वर की तलाश की मत करो। जीते जी जो अपने जीवन को स्वर्ग जैसा बना देता है मरने के बाद उसे स्वर्ग जरुर प्राप्त होता है। जो अपने घर को जीते जी नरक और परिवार को नर्क बनाकर जीएगा। अपने परिवार का वातावरण नर्क बनाकर जीएगा। एक दूसरे से दुश्मनी का भाव रखेगा। फिर मंदिर में भी बैठे रहो तो भगवान भी तुम्हे स्वर्ग नहीं देने वाला है। मंदिरों में स्वर्ग मत तलाशों घर को स्वर्ग बनाओं। यदि घर से नरक के रास्ते खुलते है तो मेरे पास आ जाना घर से ही नरक की सीढी होती है। कही भी दो सीढिया नहीं होती है। थोडा सा सोच बदल यदि व्यक्ति बदल ले तो घर ही स्वर्ग बन जाता है।

मंदिर में यदि एक घंटे की पूजा पाठ करते है ध्यान करते है और मंदिर को कितना पवित्र बनाकर रखते हो। जिस मंदिर में एक घंटे में रहना है उसे कितना शांत और बनाकर पवित्र बनाकर रखते है तो जिस घर में 23घंटे रहना है उसे अशांत क्यों बनाते हो। 1 घंटे वाली जगह को पवित्र बनाओंगे तो कुछ नहीं मिलने वालाए मंदिर तो अपने आप में पवित्र और शांत ही है। घर को पवित्र बनाओं। यदि घर को पवित्र बनाना है तो परिवार में आपस में प्रेम का दीपक जलता रहना चाहिए।
आलीराजपुर तीर्थ है
जिस नगर में जाते ही पर खुशी दिखेए चिंता नहीं दिखेए मन खुश हो जाए और अपनापन दिखता है मेरी नजर में ऐसा नगर आलीराजपुर तीर्थस्थान है। ये बहुत ही शांत स्थान है। शांति नगर में भी मिल रही है तो ये तीर्थयात्रा से कम नहीं है। इससे पूर्व स्थानीय टंकी ग्राउंड पर जैन श्रीसंघ में सामेला कर मुनिश्री की अगवानी की। जिसके बाद नगर के प्रमुख मार्गो से चल समारोह निकाला गया। प्रवचन के दौरान बडी संख्या में जैन समाजजन सहित अन्य समाज के लोग मौजूद थे। जिन्होने मुनिश्री के दर्शन वंदन किए। यह जानकारी नितेष कोठारी ने दी। 
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