सर्व धर्म के प्रतिनिधियों की धर्म व अध्यात्म विषय पर कार्यशाला संपंन
आलीराजपुर न्यूज।
भारत एक समय विश्व गुरु था। सुख शांति शक्ति व भौतिक साधनों से परिपूर्ण था। मानव मानव में प्रेम सहयोग सद्भावना थी पुनः ऐसे ही भारत को शक्तिशाली ,विश्व को श्रेष्ठ दुनिया बनाने के लिए हमें धर्म व आध्यात्म का ही सहारा लेना पड़ेगा।
उक्त विचार स्थानीय राठौड़ धर्मशाला में इंदौर से पधारे प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के धार्मिक प्रभाग के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य ब्रह्माकुमार नारायण भाई ने शनिवार को सर्व धर्म के प्रतिनिधियों की धर्म व अध्यात्म विषय पर संपंन कार्यशाला को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

नारायण भाई ने कहा कि धर्म अर्थात धारणा जब जीवन में कोई भी देवी गुणों की धारणा शांति, पवित्रता, प्रेम को धारण करके चलते हैं तो मन शक्तिशाली हो जाता है, कर्म श्रेष्ठ बनने लगते हैं , व्यवहार में संतुष्टता आने लगती है ।आज इसके बजाय बाहरी धर्म को अपनाने से जीवन गुणों से खाली हो गया इसीलिए धर्म शक्तिहीन हो गए। अब पुनः स्वधर्म आत्मिक धर्म में स्थित होने के लिए आध्यात्मिकता की आवश्यकता है ।धर्म बिना आध्यात्मिक के अंधा, अध्यात्म बिना धर्म के लंगड़ा है। आध्यात्म अर्थात आ शब्द की पढ़ाई,आ अर्थात आत्मा का अध्यन,आ अर्थात अल्फ परमात्मा व तीसरा आ अर्थात सृष्टि के आदि के आदि अंत का ज्ञान ।इन तीनों के ज्ञान का चिंतन, मनन, अध्ययन ,अभ्यास द्वारा जो अनुभूति होती है उससे संस्कार श्रेष्ठ व श्रेष्ठ संसार बन जाता है।
ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधि आशुतोष पंचोली ने कहा कि धार्मिक होना एक पद्धति है, जो ईश्वर के द्वारा धर्म स्थापको ने अपनी-अपनी मान्यता पद्धति से धर्म की स्थापना की। आध्यात्म धर्म से ऊंचा है, हर व्यक्ति धार्मिक हो सकता है पर आध्यात्मिक नहीं। आध्यात्मिक का अनुभव करने के लिए मन को कई प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है मन को निर्मल बनाना पड़ता है जो व्यक्ति निर्मल बनता है वही आध्यात्मिक है।ज्ञान की पराकाष्ठा को उंचे लेवल पर ले जाने के लिए आध्यात्मिक क्षेत्र से जोड़ना पड़ता है ।धर्म के नाम पर अनेक लड़ाइयां लड़ी उसका नतीजा कुछ नहीं निकला। धर्म का मूल सत्य है स्वयं को जानना पहचाना इस मार्ग पर चलने वाला ही आध्यात्मिक के गुण रहस्य को समझ सकता है ।
मुस्लिम समाज के साबिर बाबा ने कहा धर्म कट्टरवाद नहीं होना चाहिए धर्म ऐसा हो जो सभी को स्वीकार्य हो ।खुदा के पास आज़ान के लिए जाते हैं आज़ान का अर्थ कामयाबी के लिए आना ।खुदा की इबादत इंसानियत, मानवता आपसी भाईचारे में रहने को सिखाती है।न कि आपस में बैर रखना। ईसाई समाज के फादर रेवरेन्ट जितेंद्र जी ने कहा आपस में प्रेम नहीं होगा तो श्रेष्ठ समाज नहीं बनेगा ,श्रेष्ठ शहर नहीं बनेगा, श्रेष्ठ विश्व नहीं बन सकेगा ।अपने आप को जानने से सभी गलत चीजों से दूर हो जाएंगे। धन संपत्ति के लिए आपस में प्रेम को नहीं बिगाड़े, सब यहीं छूट जाना है ।सत्य को जानेंगे तो ईश्वर तुम्हें जानेगा। आप जब अच्छे मनुष्य बनेंगे तो श्रेष्ठ समाज का निर्माण होगा, अपने आप को चेंज करना है।
जैन समाज के भाई जवाहर लाल जी ने कहा मानव जन्म चोरासी लाख योनियों में भटकने के बाद मिला है ,इस योनि में श्रेष्ठ कर्म करते रहे, धर्म से जुड़े रहे सत्य प्रमाणिकता से जुड़े रहे तो श्रेष्ठ दुनिया बना सकते हैं ।हम हमारी नई पीढ़ी को ऐसा संस्कार दें जो देश के लिए तन, मन ,धन लुटाने के लिए तैयार हो जाए। बातों को पकड़ना नहीं चाहिए ।गिरना पड़े ऐसे सीकर पर नहीं चढ़ना चाहिए। बोहरा समाज के केजार भाई ने बताया कि जीवन विश्वास पर चलता है जन्म से ही बच्चे का मां पर होता है, शिक्षा के मामले में टीचर पर, स्वास्थ्य के बारे में डॉक्टर पर। मां के कदमों में जन्नत है, जो नारी का सम्मान करता है सभी धर्मों को साथ ले चले वही धर्म है। मनुष्य को अपने कर्म इंद्रियों को वश में करने के लिए मुस्लिम रोजा रखते हैं। किसी के साथ बदले की भावना से कार्य नहीं करना है।
कार्यक्रम के अंत में ब्रह्मा कुमार नारायण भाई ने प्रतिज्ञा कराई कि रोजाना कम से कम 15 मिनट अपने लिए निकालेंगे और ध्यान को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएंगे ,सेकंड पानी व ऊर्जा की बचत करेंगे, थर्ड सदा हर के प्रति शुभ भावना व शुभकामना रखेंगे ।अपने घर के आसपास स्वच्छता रखेंगे ।पर्यावरण बचाने के लिए कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएंगे। हम अपने मतदान का प्रयोग कर देश को विश्व गुरु बनाएंगे ।संस्था का परिचय व मंच संचालन ब्रम्हाकुमारी माधुरी बहन ने किया ।अंत में मेहमानों को ईश्वरीय सौगात दी व सभी को प्रसाद वितरित किया गया। आभार अरुण कुमार गेहलोत ने माना।




