कोविड के अनुशासन के साथ आपस मे रंग गुलाल लगाकर श्री गणेश को दी बिदाई....
कट्ठीवाड़ा से प्रेम गुप्ता की रिपोर्ट
अगले बरस तू जल्दी आ....के वाक्य के साथ ही युवा आपस मे रंग गुलाल लगाते है और प्रथम पूज्य गणेश जी को उनके धाम पर जाने की और पुनः अगले साल जल्दी ही वापस आने की प्रार्थना करते हुए उनका जल विसर्जन कर देते है...हां, पर यहां वे कोविड-19 के निर्देशों का अनुपालन भी कर रहे है...ये दृश्य आदिवासी अंचल में अनंत चतुर्दशी को जगह जगह दिखाई दिया।
आदिवासी अंचल में गणेशोत्सव की परंपरा बढ़ती जा रही है क्षेत्र के कट् ठीवाड़ा, कवछा, भुरिआम्बा, बडाखेड़ा, हवेलिखेड़ा, कदवाल, काबरीसेल, अम्बार, करेली मवड़ी, इंडलावाट, उमरवाड़ा,नानिबडोई, खामडका, खरकाली, सयडा सहित कोने-कोने में विराजित गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। दस दिनों तक श्रद्धा भक्ति से चलने वाले कार्यक्रमों के बाद विदाई में मुस्कुराती आंखों के कोने नम भी थे।
उत्साह कम नही हुआ
कोविड के खतरों के चलते प्रशासन ने पर्याप्त एहतियात बरती थी किन्तु युवाओं का उत्साह गणेशोत्सव में चरम पर था। आदिवासी अंचल में कोविड का प्रसार नही के बराबर है और सतत बरसती बारिश से ताल तलैया में बहते पानी में श्री गणेश विसर्जन आनंद पूर्वक किया गया।


