जिले में दो बडे प्राइवेट अस्पताल सीएमएचओ डा. प्रकाश ढोके के कार्यकाल में कई समय से बगैर लाइसेंस व रजिस्ट्रेशन के संचालित कैसे हो रहे थे?
सिर्फ अस्पताल बंद करवा दिए सीएमएचओ को क्यों छोड़ दिया, पूछ रही है जिले की जनता
हर्षित शर्मा
अलीराजपुर न्यूज जोबट रिपोर्टर।
जिला मुख्यालय व जोबट कस्बे में संचालित दो अलग अलग प्राइवेट अस्पताल में इलाज के दौरान एक पुलिसकर्मी और एक स्वास्थ्यकर्मी की मौत हो गई थी। मौत के बाद मृतिका के पति, हिंदू युवा जनजाति संगठन, भाजपा युवा मोर्चा आदि ने कलेक्टर सुरभि गुप्ता से पूरे मामले की जांच की मांग की गई थी। कलेक्टर के निर्देश पर सीएमएचओ ने जांच कमेटी बनाई थी। जांच कमेटी द्वारा जांच कर पता लगाया गया कि अलिराजपुर जनरल हॉस्पिटल और मिशन अस्पताल जोबट विगत कई वर्षों से बगैर लाइसेंस व रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहा है। जांच में और भी कई तथ्य सामने आए हैं। तत्पश्चात कोतवाली थाने अलीराजपुर और जोबट थाने पर विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज भी की गई। हालांकि दोनों निजी अस्पताल को प्रशासन के द्वारा सील भी कर दिया गया है। अलीराजपुर में अस्पताल संचालक कि गिरफ्तारी भी हो चुकी है। वही जोबट में अभी गिरफ्तारी बाकि हैं। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है। कि अलीराजपुर जिले के यह दोनों बड़े अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के कई वर्षों से संचालित हो रहे थे। जांच में पाया गया जोबट के मिशन अस्पताल का 2017 से रजिस्ट्रेशन नहीं था। तो अलीराजपुर जिले के सीएमएचओ डॉक्टर प्रकाश ढोके का इन प्राइवेट अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन पर ध्यान क्यों नहीं गया, विगत कई वर्षों से डॉ.प्रकाश ढोके भी सीएमएचओ के पद पर पदस्थ हैं। फिर इन प्राइवेट अस्पतालों पर ध्यान क्यों नहीं कोरोनाकाल के दौरान यही सीएमएचओ साहब जोबट के मिशन अस्पताल को कोविड सेंटर बनाने के लिए मिशन अस्पताल जा पहुंचे थे। मतलब इससे तो यह साफ जाहिर होता है की सीएमएचओ साहब को यह तो पता है कि जोबट में मिशन अस्पताल संचालित हो रहा है लेकिन यह क्यों नहीं पता है कि यह अस्पताल बगैर पंजीयन के नियमों के विरुद्ध संचालित हो रहा हैं।
बंगाली चिकित्सक व प्रायवेट अस्पताल से मिलती है मोटी कमाई
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आदिवासी बहुल इस जिले में जहां एक ओर स्वास्थ्य सेवाओं, सुविधाओं व चिकित्सकों की कमी है वहीं दूसरी ओर जिले में इसका फायदा बंगाली चिकित्सक भी जम कर उठा रहे है। साथ ही जिले में नए नए संचालित हुए कुछ प्रायवेट अस्पताल व जोबट में सालों से संचालित मिशन अस्पताल भी सीएमएचओ साहब की मेहरबानी से बहुत ही फल फूल रहे है। फलेंगे फूलेंगे भी क्यों नहीं क्यों कि जिले में इस ओर गंभीरता से ध्यान देने वाला कोई है ही नहीं। बंगाली चिकित्सकों से भी प्रति माह एक बड़ी रकम लिफाफे में स्वास्थ्य व चिकित्सा विभाग के बड़े अफसरों को पहंुचाई जाती है। साथ ही सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रायवेट अस्पताल वाले मामलों में जिले के स्वास्थ्य विभाग के एक बड़े अफसर को करीब 5 पेटी का माल भी मिला है ऐसी चर्चा जोबट नगर में जोरों पर है। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि पांच पेटी का माल जोबट में मिशन अस्पताल की अनियमितताओं को कमजोर करने व कोई बड़ा मामला नहीं बनाने के लिए दिए गए है। इसका भी पता हमारे संवाददाता के द्वारा लगाया जा रहा है कि आखिर इतनी बड़ी डील किसने व कैसे की है इसका भी शीघ्र ही खुलासा किया जाएगा। कुछ सूत्र भी हाथ लगे है।
कलेक्टर मैडम सीएमएचओ साहब पर मेहरबानी क्यों?
यहां पर एक सवाल कलेक्टर मैडम से भी बनता है कि कलेक्टर साहब आपके द्वारा जांच भी करवा ली गई जांच में जो दोषी पाए गए उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो गई। लेकिन कार्रवाई तो सीएमएचओ साहब पर भी बनती है। क्योंकि डा. प्रकाश ढोके के सीएमएचओ के पद पर आसीन रहते हुए इन्होंने प्राइवेट अस्पतालों पर ध्यान क्यों नहीं दिया?? कलेक्टर साहब आपके द्वारा कई बार मीटिंग में झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई करने का आपने निर्देश भी दिया था। आप के निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया ऐसे कई सवाल यहां पर खड़े हो रहे हैं। क्या आपके द्वारा सीएमएचओ पर कुछ कार्रवाई की जाएगी। अलीराजपुर जिले की जनता एक कार्रवाई सीएमएचओ पर भी देखना चाहती है। जनता यह पूछ रही है कि कलेक्टर मैडम सीएमएचओ साहब पर इतनी मेहरबान क्यों हैं। क्यों बार बार उन्हें बचा ले जाती है।
इन सभी स्थितियों को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि आखिर बंगाली चिकित्सकों व प्रायवेट अस्पतालों से मिलने वाले हरे हरे गांधीजी अपना असर दिखाते ही है।


